भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019 : Latest Report on Forest Cover

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019
भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019
  • 30 दिसंबर, 2019 को  भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019 (India State of Forest Report-ISFR) जारी की गई, जो इस श्रृंखला में 16वीं रिपोर्ट है। 
  • देहरादून स्थित भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India) द्वारा प्रत्येक दो वर्ष पर सुदूर संवेदन (Remote Sensing) आधारित उपग्रह चित्रण के माध्यम से देश में वनों एवं वृक्षों की स्थिति पर ‘भारत वन स्थिति रिपोर्ट’ जारी की जाती है।
  • 1987 से, भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट, हर दो वर्ष के अंतराल पर भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा प्रकाशित की जाती है।
  • इस रिपोर्ट में वन एवं वन संसाधनों के आकलन के लिये भारतीय दूर-संवेदी उपग्रह रिसोर्ससेट-2 (LISS III sensor onboard Resourcesat-2 satellite) से प्राप्‍त आँकड़ों का उपयोग किया गया है। 
  • ‍संयुक्त राष्‍ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत को दुनिया के उन 10 देशों में 8वाँ स्‍थान दिया गया है जहाँ वार्षिक स्‍तर पर वन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।
  • अंतराष्ट्रीय स्तर पर, संयुक्त राष्‍ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा वन संसाधनों के सन्दर्भ में हर पांच वर्ष में एक बार रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है | सबसे ताज़ा रिपोर्ट 2015 की है जो 2011-2015 के लिए प्रकाशित की गयी थी |

वन की परिभाषा

रिपोर्ट में वनों को घनत्व के आधार पर तीन वर्गों–सघन वन (Very Dense Forest), घने वन (Moderately Dense Forest) और खुले वन (Open Forest) में बाँटा गया है।

  • सघन वनों में, ऐसे वन आते हैं जहाँ वृक्षों का घनत्व 70 प्रतिशत से अधिक है।
  • घने वनों में, वृक्षों का घनत्व 40 से 70 प्रतिशत होता है। 
  • खुले वनों में, वृक्षों का घनत्व 10 से 40 प्रतिशत होता है। 
  • झाड़ियों में, ऐसे वन क्षेत्र आते हैं जहाँ वन-भूमि में पेड़ो की पैदावार बहुत कमज़ोर होती है और वृक्षों का घनत्व 10 प्रतिशत से भी कम होता है।
  • गैर-वन क्षेत्र में, ऐसे क्षेत्र आते हैं जो वनों के किसी भी वर्गीकरण में शामिल नहीं हों।

2015 में शीर्ष दस देशों के लिए वन क्षेत्र(संयुक्त राष्‍ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार  )

S.Noदेशवन क्षेत्र (000 हेक्टेयर)देश के कुल क्षेत्र का %वैश्विक वन क्षेत्र का %
रूसी संघ8,14,93148 20 
ब्राजील4,93,53858 12 
कनाडा3,47,06935 
अमेरिका3,10,09532 
चीन2,08,32122 
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कॉंगो1,52,57865 
ऑस्ट्रेलिया1,24,75116 
इंडोनेशिया91,01050 
पेरू73,97358 
10 भारत70,68222 

सबसे अधिक वार्षिक वन क्षेत्र में वृद्धि करने वाले देश (2010-15)

  1. चीन
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. चिली
  4. संयुक्त राज्य अमेरिका
  5. फिलीपींस
  6. गैबॉन
  7. लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक
  8. भारत
  9. वियतनाम
  10. फ्रांस

ISFR(भारत वन स्थिति रिपोर्ट) 2019  से प्रमुख निष्कर्ष

विवरण ISFR 2017 पर आधारित ISFR 2019 पर आधारित 
देश में वनों और वृक्षों से आच्छादित कुल क्षेत्रफल8,02,088 वर्ग किमी. (24.39%)8,07,276 वर्ग किमी. (24.56%)
भौगोलिक क्षेत्रफल में वनों का हिस्सा7,08,273 वर्ग किमी. (21.54%)7,12,249 वर्ग किमी. (21.67%)
वृक्षों से आच्छादित क्षेत्रफल93815 वर्ग किमी. 95,027 वर्ग किमी. (2.89%)
वनों से आच्छादित क्षेत्रफल में वृद्धि6778 वर्ग किमी.3,976 वर्ग किमी.  (0.56%)
वृक्षों से आच्छादित क्षेत्रफल में वृद्धि1243 वर्ग किमी.1,212 वर्ग किमी.  (1.29%)
वनावरण और वृक्षावरण क्षेत्रफल में कुल वृद्धि8021 वर्ग किमी. (1%)5,188 वर्ग किमी.  (0.65%)
भौगोलिक क्षेत्रफल में वनों और वृक्षावरण का हिस्सा24.39%24.56%

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019 का राज्यवार आँकडा

% के संदर्भ में सर्वाधिक वनावरण वाले राज्य 
मिज़ोरम85.41%
अरुणाचल प्रदेश79.63%
मेघालय76.33%
सर्वाधिक वन क्षेत्रफल वाले राज्य   (वर्ग किमी.)
मध्य प्रदेश77,482
अरुणाचल प्रदेश66,688
छत्तीसगढ़55,611

वन क्षेत्रफल में वृद्धि वाले शीर्ष राज्य 

ISFR 2017 ISFR 2019 
आंध्र प्रदेश(2141 वर्ग किमी)कर्नाटक (1,025 वर्ग किमी)
कर्नाटक (1101 वर्ग किमी.)आंध्र प्रदेश (990 वर्ग किमी)
केरल (1043 वर्ग किमी).केरल (823 वर्ग किमी)

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019 प्रमुख बिंदु 

  • देश में मैंग्रोव क्षेत्रफल में 2017 की तुलना में 54 वर्ग किमी (1.10%) बढ़ा है।
  • देश में कुल बाँस क्षेत्रफल लगभग 1,60,037 वर्ग किमी है। ISFR 2017 के अनुमान की तुलना में बाँस क्षेत्रफल में 3,229 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है।
  •  वर्तमान मूल्यांकन के अनुसार, वन में कुल कार्बन स्टॉक 7,124.6 मिलियन टन अनुमानित है। 2017 के अंतिम आकलन की तुलना में देश के कार्बन स्टॉक में 42.6 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। वार्षिक वृद्धि 21.3 मिलियन टन है, जो कि 78.1 मिलियन टन CO2 eq है।

नोट: अकार्बनिक और कार्बनिक रूप में वनों में जो कार्बन मौजूद रहता है, उसे ही कार्बन स्टॉक की संज्ञा दी जाती है। वन क्षेत्रों में कार्बन की मात्रा कम होने को कार्बन स्टॉक में कमी होना कहा जाता है।घने वन क्षेत्र, वायुमंडल से सर्वाधिक मात्रा में कार्बन डाईऑक्‍साइड सोखने का काम करते हैं।

प्राकृतिक वनस्पति के तीन प्रकार-1. वन 2. घास तथा 3. झाड़ियाँ |

वनों का महत्व :

  • जलवायु का नियमन होता है। वनों से नमी रहने के कारण तापमान कम हो जाता है तथा जलवायु में परिवर्तन होने से वर्षा होती है। 
  • वर्षा के जल का बहाव, वनों के कारण कम होने से बाढ़, भू-स्खलन और भू-अपरदन नहीं हो पाता तथा इससे भूमिगत जल स्तर में भी वृद्धि होती है।
  • वन ठंडी हवाओं, आंधी, तूफान इत्यादि को भी रोकने में सहायक होते हैं। 
  • वृक्षों से गिरी सूखी पत्तियाँ ज़मीन में सड़कर खाद का काम करती है जिससे मृदा की उर्वरा शक्ति में बढ़ोत्तरी होती है। 
  • इसमें कई प्रकार की वनस्पतियाँ, जड़ी बूटी तथा दुर्लभ जीव-जन्तु पाए जाते हैं। 
  • वनों की हरियाली, प्राकृतिक सौंदर्य में वृद्धि करती है जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है एवं राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है। 

वनों का वर्गीकरण 

भारत के वनों का वर्गीकरण अनेक विद्वानों ने किया है जिनमें मुख्यतः एस.एस. चैम्पियन, डा. स्पेट तथा डा बी. पुरी इत्यादि  है। सामान्यतया जलवायु के आधार पर वनों को निम्न वर्गों में विभक्त किया जा सकता है:

  1. हिमालयी अथवा पर्वतीय वन
  2. उष्णार्द्र सदाबहार वन 
  3. आर्द्र मानसून वन
  4. उष्णार्द्र पतझड़ वाले वन 
  5. मरुस्थलीय वन 
  6. दलदली वन 

1. हिमालय प्रदेशीय अथवा पर्वतीय वन

इस प्रकार के वन उच्च हिमालय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इस प्रदेश में विभिन्न ऊँचाइयों के अनुसार वनों की प्रजातियों में भी भिन्नता पाई जाती है।हिमालय के इन वनों को आठ उप-भागों में विभक्त किया जा सकता है:उष्ण कटिबंधी सदाबहार वन :इस प्रकार के वन असम में पाए जाते हैं ये वन काफी घने होते हैं। इनमें मुख्य प्रजातियाँ जामुन, बेंत, कदम, इरूल, रोजवुड, हल्दू, पागर, चम्पा तथा जंगली आम इत्यादि पाई जाती हैं।

उष्ण कटिबंधी शुष्क पतझड़ वाले वन :

यह वन समस्त हिमालय क्षेत्र की तलहटी में पाए जाते हैं। इनमें मुख्य प्रजातियाँ सागवान, रोजवुड़, अमलताश, पलाश, बाँस, सैटनवुड इत्यादि पाई जाती है।

चौड़ी पत्ती वाले वन :

पश्चिम  बंगाल तथा असम हिमालय के निचले ढलानों पर इस प्रकार के वन पाए जाते हैं। इनमें मैचिलस, मैलेसिमा तथा जामुन इत्यादि की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 

उप-उष्ण कटिबंधी चीड़ के वन :

उत्तर पश्चिम हिमालय में 1000 मीटर से 1800 मीटर की औसत ऊँचाई में यह वन पाए जाते हैं। इस प्रकार के वनों में अधिकांशतः चीड़ के ही वन पाए जाते हैं। 

उप-उष्ण कटिबंधी शुष्क सदाबहार वन :

इस प्रकार के वनों में छोटी-छोटी झाड़ियाँ इत्यादि पाई जाती हैं। शिवालिक पर्वत तथा पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 1000 मीटर से ऊपर के भागों में इस प्रकार के वन पाए जाते हैं। इन वनों में पाई जाने वाली मुख्य प्रजातियाँ खैर, बबूल इत्यादि हैं।

पर्वतीय मध्यम नम जलवायु :

इस प्रकार के वन पूर्वी हिमालय क्षेत्र में पश्चिम बंगाल के उच्च पहाड़ी भाग में पाए जाते हैं जिनमें दालचीनी, भोजपत्र, जूनियर, सितबरफर, पांगर इत्यादि प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

हिमालय मध्यम नम जलवायु :

नुकीली पत्ती वाले यह वन समूचे हिमालय भाग में कश्मीर, हिमालय प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बंगाल के पर्वतीय क्षेत्र तथा सिक्किम में 1500 मीटर से 3,000 मीटर की ऊँचाई के बीच में पाए जाते हैं- इनमें महत्त्वपूर्ण प्रजातियाँ-बाज, देवदार, फर, स्पूस, कैल, पांगर, चिलगोजा इत्यादि पाई जाती हैं।

अल्पाइन वन :

कश्मीर में ‘मर्ग’ तथा उत्तराखंड में बुगयाल नाम से प्रचलित ये अल्पाइन घास के मैदान, हिमालय क्षेत्र में 3,000 मीटर से अधिक ऊँचाई में पाए जाते हैं जिनमें विभिन्न प्रकार की झाड़ियाँ, फर्न, घास, रंग-बिरंगे पुष्प तथा सुगन्धित जड़ी-बूटियाँ इत्यादि पाई जाती है। 

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2. उष्णार्द्र सदाबहार वन

  • इस प्रकार के वन 200 सेंटीमीटर की औसत वर्षा तथा 25 डिग्री के तापमान वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं।
  • उत्तर में हिमालय की तराई, पूर्वी हिमालय के गिरिपाद प्रदेश, दक्षिण में पश्चिमी घाट के ढलान, अन्नामलाई, नीलगिरी ,केरल, कर्नाटक तथा अंडमान निकोबार द्वीप समूह में इस प्रकार के वन पाए जाते हैं।
  • इन वनों में जंगली आम, रोजवुड, बाँस, ताड़, महोगनी, रबड़ इत्यादि वृक्ष बहुतायात से पाए जाते हैं। इन वृक्षों की ऊँचाई सामान्यतया 30 से 40 मीटर तक अथवा उससे अधिक होती है।

3. आर्द्र मानसून वन

  • इस प्रकार के वन पंजाब से असम तक हिमालय के वाह्य ढलानों पर मिलते हैं जहाँ 100-200 सेंटीमीटर औसत वर्षा होती है।
  • दक्षिण में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल के शुष्क भागों तथा उत्तर में उत्तर प्रदेश व बिहार और पूर्व में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा तथा पश्चिम में पंजाब राज्यों में यह वन फैले हुए हैं।
  • इन वनों में सागौन, आम, पलाश, साल, लालचन्दन, साख, तेंदू, शहतूत इत्यादि की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

4. उष्णार्द्र पतझड़ वाले वन

  • इस प्रकार के वन प्रायद्वीपीय भारत के मध्य भागों में मुख्यतया पाए जाते हैं।
  • इसके अलावा उत्तर पश्चिम में हरियाणा, पंजाब से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक राज्यों में भी यह वन पाए जाते हैं।
  • आंशिक रूप से यह वन कावेरी, कृष्णा, गोदावरी, ताप्ती, नर्मदा, चम्बल नदियों के आस-पास भी पाए जाते हैं।
  • दक्षिण में नीलगिरी की पहाड़ियों पर 1,800 मीटर तक, सतपुड़ा की पहाड़ियों पर 1,000 मीटर तक यह वन पाए जाते हैं।
  • इन वनों में मुख्य प्रजातियाँ लारेल, खेर, साल, बाँस, मैग्नेलिय चैस्टनेट के वृक्ष बहुतायात से पाए जाते हैं|

5. मरुस्थलीय वन

  • इन वृक्षों की जड़े काफी मोटी तथा गहराई तक होती हैं ताकि वे जल के अभाव में भू-गर्भ के जल को सोखकर अपने तनों में संचित कर सकें।
  • इन झाड़ियों की पत्तियाँ बहुत छोटी अथवा काँटों के रूप में होती है ताकि जल का कम-से-कम वाष्पीकरण हो सके।
  • मुख्यतया उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में इस प्रकार की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • इसके अतिरिक्त दक्षिण प्रायद्वीप के शुष्क भागों, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र व गुजरात के कुछ हिस्सों में भी इस प्रकार के वन पाए जाते हैं |
  • बबूल, कीकर, खेजड़ा नागफनी, खजूर, खैर तथा रामबांस की प्रजातियाँ इस प्रकार के क्षेत्रों में पाई जाती हैं।

6. दलदली वन

  • ये वन डेल्टाई तथा पूर्वी घाट के तटीय भागों में बिखरे हुए पाए जाते हैं। दलदली मिट्टी के कारण यहाँ पाए जाने वाले वृक्षों में नमी सोखने की शक्ति होती है।
  • इन पेड़ो की ऊँचाई 30-35 मीटर के आस-पास होती है। इस प्रकार के वन गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, कृष्णा, गोदावरी आदि नदियों के डेल्टाई भाग में पाए जाते हैं।
  • गंगा, ब्रह्मपुत्र के डल्टाई भाग में ‘सुन्दरी’ नाम के वृक्षों की प्रजाति पाई जाती है जिस कारण यहाँ के वनों को सुन्दर वन भी कहा जाता है।
  • इन भागों में नारियल, ताड़, रोजीफोरा, फोनिक्स व केवड़ा आदि की प्रजातियाँ प्रमुख रूप से पाई जाती है।
What is Isfr?

यह एक रिपोर्ट है जो देहरादून स्थित भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India) द्वारा प्रत्येक दो वर्ष पर सुदूर संवेदन (Remote Sensing) आधारित उपग्रह चित्रण के माध्यम से देश में वनों एवं वृक्षों की स्थिति पर ‘भारत वन स्थिति रिपोर्ट’ जारी की जाती है।

In which state of India percentage of forest is highest?

मिज़ोरम ( 85.41%)

What percentage of total geographical area of the country is under forest?

7,12,249 वर्ग किमी. (21.67%)

Which state of India has lowest forest area?

 हरियाणा (3.62%)

Which Union territory has largest forest area?

लक्षद्वीप(90.33%)

Which state of India has 90% area under the forest?

कोई नहीं परन्तु केंद्र-शासित प्रदेश में है :लक्षद्वीप(90.33%)

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