जीनोम इंडिया पहल Genome India Initiative

जीनोम इंडिया पहल :चर्चा में क्यों है?

  • विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय ने एक परियोजना के तहत जैव-प्रौद्योगिकी विभाग को भारत के बीस हजार लोगों के जीनोम की सिक्वेंसिंग यानी अनुक्रमण किए जाने की योजना को मंजूरी दी है।

जीनोम अनुक्रमण क्या होता है?

  • इसके अंतर्गत डीएनए में मौजूद चारों तत्त्वों- एडानीन (A), गुआनीन (G), साइटोसीन (C) और थायामीन (T) के क्रम का पता लगाया जाता है।
जीनोम इंडिया पहल Genome India Initiative
जीनोम इंडिया पहल Genome India Initiative

जीन से संबंधित कुछ सामान्य बातें :

  • जीन सजीवों में सूचना की बुनियादी इकाई और डीएनए का एक हिस्सा होता है। 
  • मानव शरीर में जीनों की संख्या अस्सी हजार से एक लाख तक होती है। 
  • इस विशाल समूह को ‘जीनोम’ नाम से जाना जाता है। 
  • लगभग दस हजार बीमारियाँ हैं जिनमें सिस्टिक फाइब्रोसिस, थैलेसीमिया शामिल हैं, जिनके होने का कारण एकल जीन में खराबी को माना जाता है।
  • जीनोम थेरेपी के जरिये दोषपूर्ण जीन को निकाल कर स्वस्थ जीन को रोपित करना संभव हो सकेगा। 
  • 1988 में अमेरिकी सरकार ने अपनी ‘ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की।
    • मानव आनुवंशिक और जीनोम विश्लेषण पर इस सबसे बड़ी परियोजना को वर्ष 2003 में पूरा किया गया।
    • वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट के जरिये इंसान के पूरे जीनोम को पढ़ा।
    • इस परियोजना का लक्ष्य जीनोम सिक्वेंसिंग के जरिये बीमारियों को बेहतर ढंग से समझने, दवाओं के शरीर पर प्रभाव की सटीक भविष्यवाणी, फोरेंसिक विज्ञान में उन्नति और मानव विकास को समझने में मदद हासिल करना था।

इस परियोजना (जीनोम इंडिया पहल) में क्या कार्य करना है ? 

  • जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा बीस हजार लोगों के जीनोम की सिक्वेंसिंग किए जाने है | 
  • जीनोम की सिक्वेंसिंग खून के नमूने के आधार पर की जाएगी। 
  • प्रत्येक व्यक्ति के डीएनए में मौजूद एडानीन, गुआनीन, साइटोसीन और थायमीन के सटीक क्रम का पता लगाया जाएगा।
  • इस परियोजना में बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान एवं कुछ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों सहित लगभग 20 संस्थान शामिल होंगे। 

जीनोम इंडिया पहल का महत्व

  • डीएनए सीक्वेंसिंग से लोगों की बीमारियों का पता लगाकर समय रहते इलाज किया जा सकता है।
    • साथ ही भावी पीढ़ी को रोग-मुक्त करना संभव होगा। 
  • दुनिया के कई देश अब अपने नागरिकों की जीनोम मैपिंग करके उनके यूनीक जेनेटिक ट्रेट्स को समझने में लगे हैं|
    • ताकि किसी बीमारी विशेष के प्रति उनकी संवेदनशीलता के मद्देनज़र व्यक्तिगत दवाओं को तैयार करने में मदद मिल सके।
  • मानव जीनोम को अनुक्रमित किए जाने के बाद प्रत्येक व्यक्ति की अद्वितीय आनुवंशिक संरचना तथा रोग के बीच संबंध को लेकर वैज्ञानिकों को एक नई संभावना दिख रही है।
  • जीनोम अनुक्रम को जान लेने से यह पता लग जाएगा कि
    • कुछ लोग कैंसर, कुछ मधुमेह और अल्जाइमर और अन्य बीमारियों से ग्रस्त क्यों होते हैं। 
  • जीनोम मैपिंग से बीमारी होने का इंतजार किए बगैर व्यक्ति की जीन-कुंडली को देखते हुए उसका इलाज पहले से शुरू किया जा सकेगा। 

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