सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में सरकार की पहल

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में सरकार की पहल

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में सरकार की पहल

  • हाल ही में प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के रीवा में स्थापित 750 मेगावाट की ‘रीवा सौर परियोजना’ (Rewa Solar Project) को राष्ट्र को समर्पित किया।
    • इस सौर पार्क को ‘रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड’ ने विकसित किया है |
      • यह ‘मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड’ और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई ‘सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया’ (Solar Energy Corporation of India– SECI) की संयुक्त उद्यम कंपनी है।
    • यह परियोजना वार्षिक तौर पर लगभग 15 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगी। 
  • भारत सरकार ने 2022 के आखिर तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा संस्‍थापित क्षमता का लक्ष्‍य निर्धारित किया है।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में सरकार की पहल 

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में सरकार की पहल
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में सरकार की पहल

राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन 

  • इस मिशन को जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन योजना भी बोला जाता है |
    • इसकी शुरुआत 2009 में हुई थी |
  • यह नेशनल एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज (NAPCC) के आठ मिशनों में से एक है।
  • इस मिशन का लक्ष्य 2022 तक 20 हजार मेगावाट क्षमता वाली ग्रिड से जोड़ी जा सकने वाली सौर बिजली की स्‍थापना और 2 हजार मेगावाट के समतुल्‍य गैर-ग्रिड सौर संचालन के लिए नीतिगत कार्य योजना का विकास करना है।
    • इसमें सौर तापीय तथा प्रकाशवोल्टीय दोनों तकनीकों के प्रयोग का अनुमोदन किया गया।
    • इस मिशन का उद्देश्‍य सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश को वैश्विक नेता के रूप में स्‍थापित करना है।
    • यह भारत को दुनिया के सबसे बड़े हरित ऊर्जा उत्पादकों में से एक बना देगा।
  • 2022 तक ग्रिड समानता का लक्ष्‍य हासिल करने के लिए अनुसंधान और विकास के समर्थन और क्षमता विकास क्रियाओं का बढ़ावा शामिल है।
  • राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन (National Solar Mission) का उद्देश्‍य सौर ऊर्जा के विकास एवं उपयोग को बढ़ावा देना है।
  • राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का लक्ष्‍य दीर्घकालिक नीति, बड़े स्‍तर पर परिनियोजन लक्ष्‍यों, महत्त्‍वाकांक्षी अनुसंधान एवं विकास तथा महत्त्वपूर्ण कच्‍चे माल, अवयवों तथा उत्‍पादों के घरेलू उत्‍पादन के माध्‍यम से देश में सौर ऊर्जा सृजन की लागत को कम करना है। 

किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महाअभियान (कुसुम) स्कीम :Pradhan Mantri Kusum Yojana

  • कुसुम योजना की मदद से किसान अपनी भूमि पर सोलर पैनल लगाकर बिजली का उपयोग खेती के लिए कर सकते हैं।
  • केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत 2022 तक देशभर में तीन करोड़ सिंचाई पंप को बिजली, डीजल की जगह सौर ऊर्जा से चलाने का लक्ष्य रखा है।
  • इस योजना में कुल 1.40 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी।
  • केंद्र सरकार इस योजना में 48 हजार करोड़ रुपये का योगदान करेगी, जबकि इतनी ही राशि राज्य सरकार भी देगी।
  • किसानों को कुसुम योजना के तहत सोलर पंप की कुल लागत का सिर्फ 10 फीसदी ही खर्च करना होगा।
  • केंद्र सरकार की कुसुम योजना के तहत किसानों को दो तरह से फायदा होगा।
    • पहला, उन्हें सिंचाई के लिए फ्री बिजली मिलेगी।
    • दूसरा, वह अतिरिक्त बिजली को किसी भी बिजली कंपनियों को बेच सकते हैं।
  • किसान अपने खाली जगह पर सोलर ऊर्जा प्लांट लगाकर उससे बनने वाली बिजली को बेचकर कमाई भी कर सकते हैं।
  • योजना के पहले चरण में सरकार 27.5 लाख सोलर पंप सेट मुफ्त दे रही है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन

  • यह गठबंधन सौर ऊर्जा संपन्न देशों का एक संधि आधारित अंतर-सरकारी संगठन (Treaty-based International Intergovernmental Organization) है। 
  • ISA की स्थापना की पहल भारत ने की थी |
    • पेरिस में 30 नवंबर, 2015 को संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के दौरान CoP-21 से पृथक भारत और फ्रांस ने इसकी संयुक्त शुरुआत की थी।
  • कर्क और मकर रेखा के मध्य आंशिक या पूर्ण रूप से अवस्थित 122 सौर संसाधन संपन्न देशों के इस गठबंधन का मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में है।
  • ISA से जुड़े 67 देश फ्रेमवर्क समझौते की पुष्टि कर दी है।
    • फ्रेमवर्क में वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा क्षमता और उन्नत व स्वच्छ जैव-ईंधन प्रौद्योगिकी सहित स्वच्छ ऊर्जा के लिये शोध और प्रौद्योगिकी तक पहुँच बनाने हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने तथा ऊर्जा अवसंरचना एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में निवेश को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया गया है।
  • ISA के प्रमुख उद्देश्यों में 1000 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा उत्पादन की वैश्विक क्षमता प्राप्त करना है।

NOTE : नवीकरणीय ऊर्जा

  • यह ऐसी ऊर्जा है जो प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर करती है।
    • इसमें सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, पवन, ज्वार, जल और बायोमास के विभिन्न प्रकारों को शामिल किया जाता है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन, ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों की अपेक्षा काफी विस्तृत भू-भाग में फैले हुए हैं |
    • ये सभी देशों को काफी आसानी हो उपलब्ध हो सकते हैं।
  • ये पर्यावरण के अनुकूल हैं।
  • इसमें निम्नलिखित को शामिल किया जाता है:
    • वायु ऊर्जा
    • सौर ऊर्जा
    • हाइड्रोपावर
    • बायोमास
    • जियोथर्मल

सौर ऊर्जा क्षेत्र

  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अपने नवीनतम विश्व ऊर्जा आउटलुक में अनुमान लगाया है कि 2050 तक विश्व में सौर ऊर्जा से लगभग 3,142 गीगावॉट बिजली हासिल होगी, जो कि अभी 495 गीगावाट है।
  • सौर ऊर्जा की क्षमता इतनी है कि वह 2035 तक कोयले और गैस को पछाड़ कर बिजली का सबसे बड़ा स्त्रोत बन सकती है।
  • सरकार का लक्ष्य है कि 2022 तक देश में 170 गीगावाट (1.70 लाख मेगावाट) अक्षय ऊर्जा उत्पादन हो।
    • इसमें से 100 गीगावाट सोलर पावर का लक्ष्य है।
    • इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार के पास दो साल का समय बचा है और 31 दिसंबर 2019 तक देश में लगभग 85908 मेगावाट क्षमता के अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं।
    • इनमें पवन ऊर्जा की उत्पादन क्षमता 37505 मेगावाट, सौर ऊर्जा की उत्पादन क्षमता 33730 मेगावाट शामिल है।
  • भारत में विगत एक दशक के दौरान बढ़ती आबादी, आधुनिक सेवाओं तक पहुँच, विद्युतीकरण की दर तेज होने और जीडीपी में वृद्धि की वजह से ऊर्जा की मांग तेज़ी से बढ़ी है |
    • इसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के बजाय, सौर ऊर्जा के ज़रिये आसानी से पूरा किया जा सकता है।
    • सौर ऊर्जा क्षेत्र, ऊर्जा उत्पादन और मांगों के बीच की बढ़ती खाई को बहुत हद तक पाट सकता है।
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में सरकार की पहल
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में सरकार की पहल

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