मानव एटलस पहल और उम्मीद पहल

मानव एटलस पहल और उम्मीद पहल :यह क्या है ?

  • यह जैव प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी कंपनी पर्सिसटेंट सिस्टम द्वारा शुरू किया गया एक पहल है।
  • इसके अंतर्गत मानव ऊतकों और अंगों की आणविक जानकारियाँ अर्जित तथा एकीकृत की जाएगी।

इसका उद्देश्य क्या है ?

  • इसका उद्देश्य मानव शरीर क्रिया विज्ञान पर आधारित ज्ञान में सुधार करना है।
  • यह शोधकर्ताओं को वर्तमान ज्ञान में उपस्थित कमियों को सुधारने और भविष्य में रोगों की पहचान एवं उसके निदान से जुड़ी परियोजनाओं में में सहायक होगा।

विवरण

  • इस परियोजना को भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Science Education and Research- IISER) और पुणे स्थित नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंसेस (National Center for Cell Sciences- NCCS) द्वारा निष्पादित किया जाएगा।
  • ‘मानव’ (MANAV)
    • जीव विज्ञान के छात्रों को जीव विज्ञान से जुड़ा साहित्य पढ़ने में,
    • अपने कौशल को निखारने,
    • जैविक प्रणाली के बारे में अपनी समझ को उन्नत करने में सहायता करेगी।

उम्मीद पहल (Unique Methods of Management and Treatment of Inherited Disorders- UMMID)

मानव एटलस पहल और उम्मीद पहल :यह क्या है ?

  • इस पहल को केन्‍द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने शुरू है |
  • यह नवजात शिशुओं में वंशानुगत आनुवंशिक रोगों से निपटने के लिए शुरू किया गया है।

इस पहल को शुरू करने का क्या कारण है ? 

  • जीन से संबंधित पैदायशी और अनुवांशि‍कीय बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं | 
  • भारत के शहरी क्षेत्रों में जन्म से पहले और जन्म के समय की जन्मजात विकृतियाँ तथा आनुवंशिक विक़ार शिशुओं की मृत्यु का, कम वजन तथा संक्रमण के बाद तीसरा सबसे बड़ा कारण है।

इसके पहल के तहत क्या किया जाना है ?

मानव एटलस पहल और उम्मीद पहल
मानव एटलस पहल और उम्मीद पहल
  • सरकारी अस्पतालों में परामर्श, प्रसव-पूर्व चिकित्सा, प्रबंधन तथा देखभाल प्रदान करने के लिये निदान (राष्ट्रीय वंशानुगत रोग प्रबंधन-National Inherited Diseases Administration- NIDAN) केंद्रों की स्थापना करना ।
  • मानव जेनेटिक्स के क्षेत्र में कुशल चिकित्सकों को बढ़ावा देना।
  • आकांक्षी जिलों के अस्पतालों में आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की जाँच करना।
  • चिकित्सकों के बीच आनुवंशिक विकारों के बारे में जागरूकता फैलाना और अस्पतालों में आणविक निदान (Molecular Diagnostics) की व्यवस्था सुनिश्चित करना।

जीन चिकित्सा के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश

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