Important करेंट अफेयर्स Question and Answer for UPSC Prelims 2020 1

Important करेंट अफेयर्स Question and Answer for UPSC Prelims 2020

1.भारत के सहकारी बैंकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: 

  1. इसकी स्थापना विभिन्न राज्यों के सहकारी समितियों से संबंधित विभिन्न अधिनियमों के आधार पर की गयी है l 
  2. इसके ग्राहक, इसके मालिक भी हो सकते हैं। 
  3. यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जैसे नियामक के दायरे में नहीं आते हैं। 

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है /हैं?

केवल 1

केवल 1 और 2

2 और 3

1 ,2 और 3

व्याख्या :

  • भारतीय सहकारी बैंकिंग का इतिहास वर्ष 1904 में सहकारी समिति अधिनियम के पारित होने के साथ शुरू हुआ।
    • इस अधिनियम का उद्देश्य सहकारी ऋण समितियों की स्थापना करना था।
  • सहकारी बैंक एक वित्तीय संस्थान हैं जो एक सहकारी आधार पर स्थापित होती हैं और उनके सदस्यों से संबंधित होती हैं अर्थात एक सहकारी बैंक का ग्राहक, इसका मालिक भी हैं।
  • सहकारी बैंकों, राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत किया गया है। 
    • ये भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दो कानूनों, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 और बैंकिंग कानून (सहकारी समितियाँ) अधिनियम, 1965 के तहत आते हैं।
    • भारत में सहकारी बैंकों को मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा गया है – शहरी और ग्रामीण।
  • ग्रामीण सहकारी ऋण संस्थान या तो अल्पकालिक या दीर्घकालिक प्रकृति के हो सकते हैं।
    • अल्पकालिक सहकारी ऋण संस्थानों को राज्य सहकारी बैंकों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों में उप-विभाजित किया जाता है।
    • दीर्घकालिक संस्थान या तो राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (SCARDBs) या प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (PCARDBs) हैं।
  • शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) अनुसूचित या गैर-अनुसूचित होते हैं। 
    • अनुसूचित और गैर-अनुसूचित यूसीबी दो प्रकार के हैं- बहु-राज्य और एक राज्य में काम करने वाले।
    • शहरी सहकारी बैंकों को या तो संब‍ंधित राज्‍य के राज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम के तहत पंजीकृत किए जाते हैं या बहु राज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत होते हैं, जब बैंक एक से अधिक राज्‍य में परिचालनरत हो।

2. निक्षेप(जमा) बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम(डीआईसीजीसी) के सन्दर्भ में,निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. किसी बैंक के विफल होने की स्थिति में, यह जमाराशियों को बीमा सुरक्षा प्रदान करता है। 
  2. जब एक बैंक बंद होता है, तो बैंक के जमा-कर्ता अपनी जमा राशि का 50% इससे प्राप्त करने के हकदार होते हैं।
  3. इसके द्वारा प्राथमिक सहकारी समितियों का बीमा नहीं किया जाता है। 

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही नहीं है /हैं?

केवल 2 

केवल 1 और 2

2 और 3

1 ,2 और 3

व्याख्या :

पृष्ठभूमि

  • 1948 में बंगाल में बैंकिंग संकट के बाद पहली बार बैंक में रखी गयी जमाराशियों का बीमा कराने की संकल्पना पर विशेष ध्यान दिया गया ।
  • 1960 में पलाइ सेंट्रल बैंक लिमिटेड और लक्ष्मी बैंक लिमिटेड के विफल हो जाने के बाद रिज़र्व बैंक और केंद्र सरकार द्वारा जमाराशियों का बीमा करने के संबंध में गंभीरता पूर्वक विचार किया गया ।
  • 21 अगस्त 1961 को संसद में निक्षेप(जमा) बीमा निगम (डीआइसी) बिल प्रस्तुत किया गया । 
  • संसद द्वारा इसे पारित किये जाने के बाद 7 दिसंबर 1961 में इस बिल को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई और 1 जनवरी 1962 से निक्षेप बीमा अधिनियम, 1961 लागू हुआ ।
  • इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने रिज़र्व बैंक के परामर्श से जुलाई 1960 में एक ऋण गारंटी योजना तैयार की । 
  • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 17(11ए) (ए) के अंतर्गत केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में स्कीम का संचालन रिज़र्व बैंक को सौंपा गया तथा बैंकों और अन्य ऋण संस्थाओं द्वारा लघु उद्योगों को स्वीकृत अग्रिमों को गारंटी प्रदान करने हेतु ऋण गारंटी संगठन (सीजीओ) के रूप में प्राधिकृत किया गया । 
  • रिज़र्व बैंक ने 14 जनवरी 1971 को भारतीय ऋण गारंटी निगम (सीजीआइसी) नामक एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी भी प्रारंभ किया ।
  • रिज़र्व बैंक ने 31 मार्च 1981 तक स्कीम का परिचालन किया।
  • जमा बीमा और ऋण गारंटी के कार्यों को समेकित करने के उद्देश्य से उपर्युक्त दोनों संगठनों (डीआइसी और सीजीसीआइ) के विलय से 15 जुलाई 1978 के निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम अस्तित्व में आया । 
  • इसके परिणामस्वरूप जमा बीमा अधिनियम,1961 का नाम बदलकर ” निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम अधिनियम(निबिप्रगानि), 1961 ” कर दिया गया।

सवाल से संबंधित व्याख्या :

  • किसी बैंक के विफल होने की स्थिति में निबीप्रगानि भारत में देय बैंक जमाराशियों को बीमा सुरक्षा प्रदान करता है।
  • निबीप्रगानि निम्नलिखित जमाराशियों को छोड़कर बचत, मीयादी , चालू, आवर्ती आदि जैसे सभी बैंक जमाराशियों को बीमा प्रदान करता है:-
    • विदेशी सरकारों की जमाराशियां;
    • केंद्र/राज्य सरकारों की जमाराशियां;
    • अंतर बैंक जमाराशियां;
    • राज्य सहकारी बैंकों में रखी गई राज्य भूमि विकास बैंकों की जमाराशियां;
    • भारत के बाहर प्राप्त जमाराशि के कारण देय कोई राशि; और
    • रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से निगम द्वारा विशेष रूप से छूट प्राप्त कोई राशि 
  • किसी बैंक में बैंक के लाइसेंस रद्द करने/परिसमापन की तारीख तक अथवा समामेलन/ विलय/ पुनर्निर्माण स्कीम लागू होने की तारीख तक प्रत्येक जमाकर्ता को किसी बैंक में समान अधिकार एवं क्षमता में रखे गए मूलधन और ब्याज दोनों के लिए अधिकतम 1,00,000 रु.(एक लाख रुपए ) तक बीमा प्रदान किया जाता है। 
  • निबिप्रगानि मूलधन और ब्याज का अधिकतम एक लाख रु. तक बीमा करता है। 
    • उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के खाते में 95,000 रु. मूलधन और उस पर उपचित ब्याज 4,000 रु है तो निबीप्रगानि द्वारा बीमाकृत राशि 99,000 रु. है। 
    • यदि उस खाते में मूलधन एक लाख है तो उस पर उपचित ब्याज का बीमा नहीं किया जाएगा, इसलिए नहीं कि यह राशि ब्याज है बल्कि इसलिए कि यह राशि बीमा सीमा से अधिक है। 
  • निबीप्रगानि द्वारा निम्नलिखित बैंकों का बीमा किया जाता है:
    • वाणिज्य बैंक : भारत में कार्यरत विदेशी बैंकों की शाखाओं, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित सभी वाणिज्य बैंक का बीमा निबीप्रगानि द्वारा किया जाता है।
    • सहकारी बैंक 
    • निबीप्रगानि द्वारा प्राथमिक सहकारी समितियों का बीमा नहीं किया जाता है। 

3.नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र (आरईसी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. आरईसी एक बाजार आधारित तंत्र है | 
  2. एक आरईसी का मतलब नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत से 1 मेगावॉट घंटा उत्पादित बिजली है|  
  3. जब कोई आरईसी खरीदता है, तो उनकी ओर से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पन्न की जाती है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है /हैं?

केवल 2 

केवल 1 और 2

2 और 3

1 ,2 और 3

व्याख्या:

  • नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र (आरईसी) एक प्रकार का बाजार आधारित इंस्ट्रूमेंट है।
  • जब मान्यता प्राप्त नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों से एक मेगावाट घंटा बिजली पैदा की जाती है, तो एक आरईसी बनता है।
  • भारत में बिजली व्यापार बाजार के लिए दो प्लेटफॉर्म है- पीएक्सआईएल और इंडिया एनर्जी एक्सचेंज (आईईएक्स)।
  • कंपनियों और राज्य सरकारों की ओर से नवीकरणीय बिजली संयंत्र स्थापित किए बिना ही अक्षय ऊर्जा की ख़रीद के लिए आरईसी की शुरुआत 2010 में हुई थी।
  • एक आरईसी का मतलब नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत से 1 मेगावॉट घंटा उत्पादित बिजली है और इसका व्यापार बिजली एक्सचेंजो पर किया जाता है। 
    • इसे सौर आरईसी और गैर-सौर आरईसी में बाँटा गया है। 
    • आरईसी ख़रीद-बिक्री हर महीने के आखिरी बुधवार को किया जाता है।
    • चालू वित्त वर्ष(2019-2020) में 2,21,000 सौर आरईसी और 13.5 लाख गैर-सौर आरईसी का व्यापार किया गया है। 
    • सौर आरईसी के लिए पिछला बंद भाव 2,400 रुपये प्रति आरईसी (उत्पादित बिजली का 2.4 रुपये प्रति किलोवाट घंटा) और गैर-सौर के लिए यह 1,850 प्रति आरईसी (1.85 रुपये प्रति किलोवॉट घंटा) था। 
    • यह भाव ग्रिड से जुड़े सौर और पवन बिजली परियोजनाओं की मौजूदा कीमत से कम है।

4. वस्तु और सेवा कर परिषद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. वस्तु और सेवा कर परिषद, वस्तु और सेवा कर से संबंधित मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को सिफारिश करने के लिए एक संवैधानिक निकाय है।
  2. जीएसटी परिषद, कर की दर, कर छूट, कर कानूनों और कर की समय सीमा तय करती है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है /हैं?

केवल 1 

केवल 2 

1 और 2 दोनों 

न तो 1 ,न ही 2 

व्याख्या :

  • यह वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) से संबंधित  मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को सिफारिश करने के लिये एक संवैधानिक निकाय है | 
  • 101वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 279A(1) में जीएसटी परिषद का प्रावधान किया गया है।
  • कुल मिलाकर 31 सदस्य होते हैं:
    • सभी 28 राज्यों एवं तीन संघ-शासित क्षेत्रों ( दिल्ली, पुद्दुच्चेरी और जम्मू-कश्मीर) के वित्त मंत्री या राज्य सरकार द्वारा निर्वाचित कोई अन्य मंत्री |
  • जीएसटी परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं।
    • यह एक संघीय निकाय के रूप में माना जाता है जहाँ केंद्र और राज्यों दोनों को उचित प्रतिनिधित्व मिलता है |
  • जीएसटी परिषद का प्रत्येक निर्णय उपस्थित और मतदान के 75% भारित बहुमत (तीन चौथाई बहुमत) होने के बाद ही लिया जाता है।
    • भारित बहुमत का सिद्धांत- केंद्र सरकार का मान एक तिहाई वोट माना जाता है।
    • सभी राज्य सरकारों का एक साथ मिलाकर कुल मान दो-तिहाई वोट माना जाता है।
  • जीएसटी परिषद के मुख्य कार्य :
    • जीएसटी परिषद का कार्य निम्नलिखित विषयों पर केंद्र और राज्यों की सिफारिश करना है –
      • केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय निकायों द्वारा वसूलें जाने वाले कर, उपकर तथा अधिशुल्क; जिन्हें GST के अंतर्गत समाहित किया जा सके | 
      • जीएसटी परिषद, कर की दर, कर छूट, कर कानूनों और कर की समय सीमा तय करती है।
      • ऐसी वस्तुएँ और सेवाएँ, जिन्हें जीएसटी के अधीन या उससे छूट प्रदान की जा सके | 
      • आदर्श जीएसटी कानून, उद्ग्रहण के सिद्धांत, IGST का बँटवारा और आपूर्ति के स्थान को प्रशासित करने वाले सिद्धांत | 
      • किसी भी प्राकृतिक आपदा के दौरान अति रिक्त संसाधन इकट्ठा करने हेतु किसी विशेष अवधि के लिये कोई विशेष दर आरोपित करना | 

5.मुद्रा स्वैप व्यवस्था (सीएसए) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: 

  1. मुद्रा की अदला-बदली का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और अन्य जोखिमों से बचना है। 
  2. विदेशी मुद्रा की कमी के समय, केंद्रीय बैंक और सरकारें दोनों पर्याप्त विदेशी मुद्रा सुनिश्चित करने के लिए विदेशी समकक्षों के साथ मुद्रा की अदला बदली का प्रयास करते हैं। 
  3. मुद्रा स्वैप समझौते हमेशा द्विपक्षीय होते हैं तथा द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देते हैं। 

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है /हैं?

केवल 2 

केवल 1 और 2

2 और 3

1 ,2 और 3

व्याख्या:

  • करेंसी स्वैप का शाब्दिक अर्थ होता है मुद्रा की अदला बदली |
  • मुद्रा स्वैप समझौते में दो देश, कम्पनियाँ और दो व्यक्ति आपस में अपने देशों की मुद्रा की अदला बदली कर लेते हैं ताकि अपनी अपनी वित्तीय ज़रूरतों को बिना किसी वित्तीय नुकसान के पूरा किया जा सके |यह बेहतर होता है परन्तु अनिवार्य नहीं है |  
  • विनिमय दर (विनिमय दर का अर्थ दो अलग अलग मुद्राओं की सापेक्ष कीमत है) की किसी भी अनिश्चित स्थिति से बचने के लिए दो देश एक दूसरे के साथ करेंसी स्वैप का समझौता करते हैं| 
  • करेंसी स्वैप से भारतीय अर्थव्यवस्था को निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं :
    • मुद्रा भंडार में कमी रुकेगी | 
    • यह विनिमय दर में परिवर्तन होने से पैदा हुए जोखिम को कम करता है  | 
    • करेंसी स्वैप समझौते से भारत के मुद्रा बाजार और विदेशी विनिमय को स्थिरता मिलेगी| 

6. भारतीय पोशन कृषि कोष(BPKK) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये :      

  1. इस परियोजना में महिला और बाल विकास मंत्रालय और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन सहयोगी हैं।
  2. यह कोष विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के विविध फसलों का भंडार होगा। 
  3. इसका उद्देश्य‍ कुपोषण को दूर करने के लिये बहु-क्षेत्रीय ढाँचा विकसित करना है |

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है /हैं?

केवल 2 

केवल 1 और 2

2 और 3

1 ,2 और 3

व्याख्या:

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने भारतीय पोषण कृषि कोष  का शुभारंभ किया

  • केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने भारतीय पोषण कृषि कोष की शुरुआत की है | 
  • बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ महिला और बाल विकास मंत्रालय ने भारतीय पोशन कृषि कोष (BPKK) लॉन्च किया है।
  • हार्वर्ड चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ भारत में स्थित अपने शोध केंद्र तथा बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ मिलकर भारत के विभिन्‍न भौगोलिक क्षेत्रों में खान-पान की आदतों का एक दस्‍तावेज तैयार करेंगे और उसका मूल्‍याकंन करेंगे।
  • इसके अलावा ये दोनों देश की क्षेत्रीय कृषि खाद्य प्रणाली का एक नक्‍शा भी बनाएँगे।
  • देश को सामान्यतः कृषि जलवायु विशेषताओं, विशेष रूप से मिट्टी के प्रकार, तापमान और वर्षा सहित जलवायु एवं इसकी विविधता तथा जल संसाधनों के आधार पर पंद्रह कृषि क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
  • यह कोष बेहतर पोषण परिणामों के लिए भारत में 128 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विविध प्रकार की फसलों का भंडार होगा।
  • इस कोष की शुरुआत के अवसर पर कृषि वैज्ञानिक डा. एम एस स्‍वामिनाथन भारत को पोषण के मामले में सुरक्षित बनाने के लिये पांच सूत्री कार्य येाजना लागू करने का सुझाव दिया जो इस प्रकार हैं:
    • महिलाओं,गर्भवती महिलाओं तथा बच्‍चों के लिये कैलोरी से भरपूर आहार सुनिश्चित करना,
    • महिलाओं और बच्‍चों में भुखमरी खत्‍म करने के लिये भोजन में समुचित मात्रा में दालों के रूप में प्रोटीन का शामिल किया जाना,
    • सूक्ष्म पोषक तत्त्वों (जैसे-विटामिन A, विटामिन B, आयरन तथा जिंक) की कमी की वजह से होने वाली भूख को खत्‍म करना,
    • पीने के लिये स्‍वच्‍छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना,
    • प्रत्येक गाँव में पोषण साक्षरता का प्रसार विशेष रूप से उन महिलाओं को पोषण के बारे में जागरुक बनाना जिनके बच्चों की आयु 100 दिन से कम है| 
बिल गेट्स ने कहा कि 
  • भारत में अगर कोई ऐसी समस्‍या है जिसका निराकरण बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन करना चाहेगा तो वह महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और बच्‍चों में कुपोषण की समस्‍या है। 
  • उन्‍होंने कहा कि इस समस्‍या का निराकरण देश के विकास में अभूतपूर्व बदलाव लाएगा और उसे सतत विकास लक्ष्‍यों को हासिल करने में मदद करेगा। 
  • उन्‍होंने बताया कि फाउंडेशन को देश में कुपोषण की चुनौती से निबटने के लिए एक सतत पोषण कार्यक्रम बनाने में भारत सरकार, डब्ल्यूसीडी और अन्य मंत्रालयों के साथ मिलकर काम करने में खुशी होगी 

7.साँस (SAANS) अभियान का उद्देश्य‍ है 

निमोनिया से होने वाली बाल मृत्यु दर को कम करना 

जन्म के समय के दोषों का शीघ्र पता लगा के बच्चों के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करना

5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में एनीमिया की रोकथाम

वैक्सीन निरोधक रोगों से बचाव

व्याख्या :

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने साँस (SAANS) अभियान की शुरुआत की है | 
  • साँस (Social Awareness and Action to Neutralise Pneumonia Successfully) अभियान का उद्देश्य नवजात शिशुओं में निमोनिया से होने वाली मौतों को कम करना है।
  • सरकार ने बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों के नियंत्रण हेतु वर्ष 2025 तक प्रति 1000 जीवित बच्चों पर होने वाली मौतों को 3 से कम करने का लक्ष्य रखा है।
  • निमोनिया से ग्रसित बच्चों को आशा (Accredited Social Health Activist-ASHA) कार्यकर्ताओं द्वारा अमोक्सीसीलीन (Amoxicillin) नामक एंटीबायोटिक की खुराक दी जाएगी।

8.पन्ना टाईगर रिजर्व क्षेत्र में कौन-सी नदी है?

नर्मदा

महानदी

तापी

केन

व्याख्या :

Important करेंट अफेयर्स Question and Answer for UPSC Prelims 2020
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Important करेंट अफेयर्स Question and Answer for UPSC Prelims 2020: ken river

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