जीन चिकित्सा के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश

जीन चिकित्सा के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश :चर्चा  में क्यों है?

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने “जीन थेरेपी-उत्पाद विकास और क्लिनिकल परीक्षणों के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश” प्रकाशित किया था ।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) क्या है ?

  • आईसीएमआर (ICMR), नई दिल्ली
    • जैव चिकित्सा अनुसंधान के निर्माण, समन्वय और संवर्धन के लिए भारत में शीर्ष निकाय, दुनिया के सबसे पुराने चिकित्सा अनुसंधान निकायों में से एक है।
    • भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के माध्यम से वित्त पोषित किया जाता है।

जीन थेरेपी /चिकित्सा क्या है ?

  • किसी खराब या अनियंत्रित जीन को उसके विकल्प जीन से बदलने की प्रक्रिया को जीन-थिरैपी (Gene Therapy) कहते हैं ।
  • इस तकनीक के इस्तेमाल से डॉक्टर दवा या सर्जरी के बजाय रोगी के शरीर में स्वस्थ जीन डाल कर उपचार कर सकते हैं।

जीन थिरैपी या जीन-चिकित्सा दो प्रकार की होती हैं:

जीन चिकित्सा के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश
जीन चिकित्सा के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश
  • जर्म लाइन जीन चिकित्सा (Germ Line Gene Therapy):
    • इसमें सामान्य जीन (Gene) को जनन कोशिकाओं (शुक्राणु या अंडे) या जायगोट (Zygote) में प्रवेश कराते हैं ।
    • यह जीन इन कोशिकाओं के जीन (Gene) में समकालिक हो जाता है ।
    • अतः थिरैपी के कारण उत्पन्न परिवर्तन आनुवंशिक/वंशानुगत (Heritable) होता है ।
    • वर्तमान समय में, सामाजिक व नैतिक कारणों से इस तकनीक का प्रयोग मानव पर प्रतिबंधित है ।
  • सोमेटिक कोशिका जीन चिकित्सा (Somatic cell gene therapy) :
    • इस थेरेपी में जीन (Gene) को रोगी की सोमेटिक कोशिकाओं (Somatic Cells) (विशेष रूप से जिन ऊतकों में सम्बन्धित जीन (Gene) की अभिव्यक्ति स्वास्थ के लिए अनिवार्य हो) में प्रवेश कराते हैं ।
    • इस विधि से जीन (Gene) अगली पीढ़ी में अपने लक्षण आनुवंशिक या वंशानुगत  नहीं कर पाता है ।
    • यह भारत में वैध है |
    • इसमें CRISPR से संबंधित और अन्य तकनीकों में किया गया जीनोम संशोधन भी शामिल है। इसकी दो श्रेणियां हैं:
      • समायोजन/संवर्धन जीन उपचार (Addition or Augmentation Gene Therapy):
        • इसमें सामान्य क्रियाशील जीन (Gene) को रोग ग्रस्त कोशिका में प्रवेश कराते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कोशिका में खराब जीन के साथ-साथ सामान्य जीन (Gene) भी पहुँच जाता है ।
      • लक्ष्यबद्ध जीन स्थानान्तरण (Targeted Gene Transfer):
        • इसमें सम्बन्धित जीन (Gene) के सामान्य ऐलील को जीनोम में पूर्व निर्धारित स्थल पर समाकलित करते हैं ।
        • जीनोम में पहले से उपस्थित खराब ऐलील को नये सामान्य ऐलील (Allele) में बदल दिया जाता है ।

जीन चिकित्सा के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश :प्रमुख दिशा निर्देश

  • यह दिशा निर्देश जीन थेरेपी के क्षेत्र में कार्यरत सभी हितधारकों पर लागू होता हैं जिसमें शोधकर्ता, चिकित्सक, नियामक समितियां, उद्योग, रोगी सहायता समूह आदि शामिल हैं।
  • इस जीन थिरैपी में वैज्ञानिक एवं नैतिक विचारों को सम्मिलित किया गया है।
  • इसमें जीन थेरेपी सलाहकार और मूल्यांकन समिति (GTAEC) के गठन का प्रावधान है |
  • जीन थेरेपी उत्पाद (GTPs) के विकास में लगे सभी संस्थानों और संस्थाओं के लिए संस्थागत जैव-सुरक्षा समिति (IBSC) की स्थापना करना अनिवार्य है।
  • जीटीपी या इसके घटकों का भंडारण और निपटान डीएनए अनुसंधान और जैव-रोकथाम 2017 की जैव-सुरक्षा पर विनियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार होना चाहिए।
  • विदेशी मूल का कोई भी GTP या उसका संशोधित संस्करण जो मानव उपयोग में पहली बार होगा, भारत में पहली बार मानव परीक्षण के लिए प्रत्यक्ष रूप से स्वीकार्य नहीं है।
  • जाँचकर्ताओं को, रोगियों की स्वायत्तता और गोपनीयता का सम्मान  करना चाहिए।

जीन थेरेपी उत्पाद (GTP) क्या है ? उदाहरण सहित समझाइये |

  • इसे एक ऐसे जैविक इकाई के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें आवश्यक जीन है, जो चिकित्सीय लाभ के लिए जीनोम में संशोधन पेश कर सकता है।
  • GTPs, जीन के सामान्य कार्य को बहाल करने के उद्देश्य से रोग पैदा करने वाले जीन को सुधार कर(सामान्य अवस्था), प्रतिस्थापन या निष्क्रिय करके काम करते हैं।

इसके अंतर्गत निम्नलिखित आते हैं (जीन चिकित्सा में वाहक) :

  • पुनः संयोजक वायरल वाहक :
    • रेट्रोवायरस(रेट्रोवायरस में आनुवंशिक सामग्री आरएनए अणुओं के रूप में होती है),
    • एडिनोवायरस (एडिनोवायरस वो वायरस हैं जिनकी आनुवंशिक सामग्री डीएनए के दोहरे धागे के रूप में होती है। )
  • गैर-वायरल वाहक 
    • नग्न डीएनए-यह वायरस परा संक्रमण की सबसे सरल तकनीक है।
    • ‘जीन गन’ की सहायता से डी एन ए के आवरण में लिपटे सोने के कणों को उच्च गैसीय दाब की सहायता से कोशिका में दाग दिया जाता है। 
  • माइक्रोबियल / बैक्टीरियल वाहक
  • घुलनशील / कण / नैनो आधारित हस्तक्षेप
  • डीएनए टीके

नए ड्रग्स और क्लिनिकल परीक्षण नियमों (2019) के अनुसार GTP drug नई दवा ’के अंतर्गत आता है और इसे हमेशा’ नई दवा माना जाएगा।

डीएनए टेक्नोलॉजी (प्रयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक 2019

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