प्लाज्मा थेरेपी तकनीक से होगा कोविड-19 पर प्रहार : यह क्या है और कैसे कार्य करता है ?

प्लाज्मा थेरेपी तकनीक से होगा कोविड-19 पर प्रहार :

प्लाज्मा थेरेपी तकनीक से होगा कोविड-19 पर प्रहार
प्लाज्मा थेरेपी तकनीक से होगा कोविड-19 पर प्रहार
  • इस उपचार का उद्देश्य किसी बीमार व्यक्ति के उपचार के लिए ठीक हो चुके व्यक्ति द्वारा हासिल प्रतिरक्षी शक्ति का उपयोग करना है |

रक्त

  • रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है। यह हल्के या गहरे लाल रंग का अपारदर्शी, गाढ़ा, क्षारीय व स्वाद में नमकीन होता है।
  • इसका PH मान 7.4 होता है |
  • मनुष्य के शरीर में रक्त की मात्रा शरीर के भार का लगभग 7% होती है।
  • खून में चार चीज़ें पायी जाती हैं :
    • प्लाज्मा
    • लाल रक्त कोशियाएं या आरबीसी
    • सफेद रक्त कोशिकाएं या डब्ल्यूबीसी
    • प्लेटलेट्स
  • प्लाज्मा, रक्त की कुल मात्रा का 55% होता है।
    • यह 90% जल का बना होता है और इसमें प्रोटीन, शर्करा, थक्का जमाने वाले कारक, खनिज आयन, हार्मोन और कार्बन डाइऑक्साइड आदि घुले रहते हैं।

अब हमे केवल रक्त प्लाज्मा को समझना है क्योंकि इसी में से एंटीबाडीज निकालकर covid-19 मरीजों का इलाज होगा |

NOTE: एंटीबाडीज क्या होते हैं?

  • एंटीबाडीज बी-लिम्फोसाइट्स नामक प्रतिरक्षी कोशिकाओं द्वारा स्रावित विशेष प्रकार के प्रोटीन होते हैं।
  • प्रतिरक्षी प्रणाली एंटीबाडीज की रूपरेखा तैयार करते हैं जो प्रत्येक आक्रमणकारी पैथोजेन के प्रति काफी विशिष्ट होते हैं।
  • एक विशिष्ट एंटीबाडी और इसका साझीदार वायरस एक दूसरे के लिए बने होते हैं।

रक्त प्लाज्मा

  • रक्त के तरल हिस्से को प्लाज्मा कहते हैं |
  • प्लाज्मा, हल्के पीले रंग का, कुछ क्षारीय, साफ, पारदर्शक और आधारभूत तरल होता है।
  • यह रक्त का लगभग 55 से 60% भाग बनाता है।
  • यह रंगहीन होता है जिसमें 90% पानी, प्रोटीन और अकार्बनिक लवण होते हैं |
  • इसमें घुलनशील रूप में ग्लूकोज, एमिनो एसिड, वसा, यूरिया, हार्मोन, एंजाइम आदि जैसे कुछ कार्बनिक पदार्थ भी होते हैं |
  • शरीर में यह इन घुलनशील पदार्थों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंचाता है |
  • प्लाज्मा के प्रोटीन में एंटीबॉडीज होते हैं जो बीमारियों और संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा प्रणाली में सहायता करते हैं |

कार्बनिक पदार्थ

  • इनमें सबसे अधिक मात्रा में प्लाज्मा प्रोटीन्स होते हैं: जो मुख्यतः मिलकर बने होते हैं
    • एल्ब्यूमिन
    • ग्लोब्यूलिंस
    • प्रोथ्रोम्बिन
    • फाइब्रिनोजन
  • ग्लोब्यूलिंस – ये एंटीबॉडीज का काम करते हैं और विषैले पदार्थों, वाइरस और जीवाणुओं को नष्ट करते हैं।
  • प्रोथ्रोम्बिन तथा फाइब्रिनोजन – ये रक्त का थक्का जमाने में सहायक हैं। इनके अतिरिक्त, हॉर्मोंस, शर्करा, विटामिन, अमीनो अम्ल, वसीय अम्ल, एंटीबॉडीज आदि होते हैं। 

अगर रक्त प्लाज्मा में से फाइब्रिनोजन नामक प्रोटीन निकाल दिया जाये तो उसे सीरम कहते हैं  | 

अकार्बनिक पदार्थ

  • इनमें सबसे अधिक मात्रा में सोडियम बाइकार्बोनेट तथा सोडियम क्लोराइड उपस्थित होते हैं।
  • इनके अतिरिक्त कुछ मात्रा में कैल्सियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, लोहा आदि के फॉस्फेट, बाइकार्बोनेट, सल्फेट, क्लोराइड्स आदि भी पाये जाते हैं।

प्लाज्मा थेरेपी तकनीक

  • भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने प्लाज्मा थेरेपी से कोविड-19 संक्रमित मरीजों के उपचार के ट्रायल की अनुमति दे दी है।
  • जब कोई वायरस व्यक्ति पर हमला करता है तो उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज कहे जाने वाले प्रोटीन विकसित करती है।
  • वे मरीज जो किसी संक्रमण से उबर जाते हैं उनके शरीर में एंटीबॉडीज विकसित हो जाते हैं।
  • इसके बाद नए मरीजों के खून में, पुराने ठीक हो चुके मरीज का खून डालकर इन एंटीबॉडीज के जरिए नए मरीज के शरीर में मौजूद वायरस को खत्म  या प्रभाव कम किया जाता है।
  • एक व्यक्ति के प्लाज्मा से चार नए मरीजों को ठीक करने में इसका इस्तेमाल हो सकता है। 
    • एक व्यक्ति के खून से 800 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जा सकता है। 
    • वहीं कोरोना से बीमार मरीज के शरीर में एंटीबॉडीज डालने के लिए लगभग 200 मिलीलीटर तक प्लाज्मा चढ़ाया जा सकता है। 
    • इस तरह एक ठीक हो चुके व्यक्ति का प्लाज्मा चार लोगों के उपचार में मददगार हो सकता है।

प्लाज्मा लेने की प्रक्रिया

  • किसी मरीज के शरीर से प्लाज्मा (एंटीबॉडीज) उसके ठीक होने के 14 दिन बाद ही लिया जा सकता है|
  • उस रोगी का कोरोना टेस्ट एक बार नहीं, बल्कि दो बार किया जाएगा। 
  • उस मरीज का एलिजा टेस्ट भी किया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि उसके शरीर में एंटीबॉडीज की मात्रा कितनी है। 
  • इसके अलावा प्लाज्मा देने वाले व्यक्ति की पूरी जांच की जाती है कि कहीं उसे कोई और बीमारी तो नहीं है।
  • रोगी के शरीर से ऐस्पेरेसिस विधि से खून निकाला जाएगा। 
  • इस विधि में खून से सिर्फ प्लाज्मा या प्लेटलेट्स जैसे अवयवों को निकालकर बाकी खून को शरीर में वापस डाल दिया जाता है।

प्लाज्मा थेरेपी तकनीक से होगा कोविड-19 पर प्रहार :प्लाज्मा थेरेपी तकनीक या एंटीबॉडी थेरेपी तकनीक : पृष्ठभूमि

  • इस तकनीक का इस्तेमाल सार्स और स्वाइन फ्लू जैसे कई संक्रामक रोगों में हो चुका है।
  • 120 साल पहले जर्मन वैज्ञानिक एमिल वान बेहरिंग ने टेटनस और डिप्थीरिया का इलाज प्लाज्मा पद्धति से किया |
    • प्लाज़्मा के सक्रिय पदार्थ का नाम ‘ऐंटीबाडी’ दिया। 
  • तब से आज तक प्लाज्मा थैरेपी का प्रयोग रेबीज, इबोला और नए कोरोना वायरस कोविड-19 से मिलते-जुलते एमईआरएस और एसएआरएस के इलाज में भी हुआ है। 
  • ऐसा देखा गया है कि प्लाज्मा थेरेपी में जो मरीज अपनी प्रतिरोधी क्षमता से खुद ठीक हो गए हैं, उनके रक्त प्लाज्मा को गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को देने से उनके स्वास्थ्य में सुधार होता है। 
  • चीन के वैज्ञानिकों ने इसी तकनीक के जरिए, मरीजों का सफल इलाज करने का दावा भी किया है|
  • चीनी वैज्ञानिकों का दावा है कि प्लाज्मा ट्रांस्प्लांट करने के तीन दिनों के अंदर कोरोना पीड़ित लोगों में सुधार दिखने लगा था|

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