भारत के लिये क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी-RCEP

भारत के लिये क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी

भारत सरकार ने चीन के संदर्भ में अपनी चिंताओं के कारण आसियान (Association of Southeast Asian Nations- ASEAN) देशों के नेतृत्त्व में बने ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी’ (Regional Comprehensive Economic Partnership- RCEP) समझौते में शामिल न होने का फैसला किया है।

  • नवंबर, 2019 में भारतीय प्रधानमंत्री ने भारत के कृषि और कुछ अन्य क्षेत्रों के हितों की रक्षा को कारण बताते हुए RCEP से अलग होने की घोषणा की थी।

NOTE : आसियान (ASEAN )

  • आसियान (ASEAN) का पूरा नाम Association of Southeast Asian Nations है।
  • आसियान की स्थापना 8 अगस्त 1967 को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आसियान घोषणापत्र (बैंकॉक घोषणा) पर संस्थापक राष्ट्रों द्वारा हस्ताक्षर करने के साथ आसियान की स्थापना हुई।
  • 1967 में आसियान घोषणापत्र (बैंकॉक घोषणा) पर संस्थापक राष्ट्रों द्वारा हस्ताक्षर करने के साथ आसियान की स्थापना हुई।
  • शुरुआत में 5 राष्ट्र इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड थे |
  • ब्रुनेई (1984), वियतनाम (1995), लाओस और म्यांमार (1997), और कंबोडिया (1999) सदस्य राष्ट्रों में शामिल हुए।
  • आसियान का आदर्श वाक्य ‘वन विजन, वन आइडेंटिटी, वन कम्युनिटी’ है।
  • इस संगठन का उद्देश्य सभी 10 देशों के बीच आर्थिक साझेदारी, व्यापार में बढ़ावा देना है | इसके साथ ही क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करना है |  
  • इस संगठन का मुख्यालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है |
भारत के लिये क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी
भारत के लिये क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी

सदस्य राष्ट्र

  1. इंडोनेशिया
  2. मलेशिया
  3. फिलीपींस
  4. सिंगापुर
  5. थाईलैंड
  6. ब्रुनेई
  7. वियतनाम
  8. लाओस
  9. म्यांमार
  10. कंबोडिया

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी-(Regional Comprehensive Economic Partnership- RCEP)

  • यह एक मुक्त व्यापार संधि है। 
  • RCEP वार्ताओं की शुरुआत नवंबर, 2012 में कंबोडिया में आयोजित आसियान समूह के 21वें शिखर सम्मेलन में की गई थी।
  • इस समझौते में 10 आसियान देशों के साथ 6 अन्य देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण कोरिया और भारत) को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया था।
  • भारत सहित RCEP के सदस्य देश विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं|
    • ये देश विश्व के एक चौथाई निर्यात तथा कुल वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30% का योगदान देते हैं। 

सबसे बड़ी चुनौती

  • भारत के लिये RCEP मुक्त व्यापार संधि में शामिल होने की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि
    • समूह के 15 में से 11 देशों के साथ भारत का व्यापार घाटे में रहा है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के साथ मुक्त व्यापार संधि में शामिल होने से  डेयरी उत्पाद से जुड़ी स्थानीय इकाईयों को भारी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ सकता है |
    • स्टील और कपड़ा उद्योग से जुड़े व्यवसाईयों ने भी इस संदर्भ में अपनी चिंताएँ व्यक्त की हैं।

भारत के लिये क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी

  • इस समूह की आपूर्ति श्रंखला में शामिल होना भारतीय औद्योगिक क्षेत्र के लिये लाभदायक हो सकता है।
  • वर्तमान परिस्थिति में चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के उत्पादकों को भारतीय बाज़ार की खुली पहुँच प्रदान करना स्थानीय उद्योगों के लिये एक बड़ी चुनौती का कारण बन सकता है।
  • नवीन तकनीकी विकास में भाग लेने और वैश्विक बाज़ार में लाभ प्राप्त करने हेतु अधिक दिनों तक इस संरक्षणवादी नीति को नहीं बनाए रखा जा सकता है।
    • अतः सरकार को स्थानीय क्षमता के विकास हेतु महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान कर नवोन्मेष, आर्थिक सहयोग जैसे माध्यमों से उनके विकास को बढ़ावा देना होगा।

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