स्टेट ऑफ द वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट 2020 -State of the World Population 2020

स्टेट ऑफ द वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट 2020

हाल ही में ‘यूनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन फंड’ (United Nations Population Fund, formerly the United Nations Fund for Population Activities- UNFPA) द्वारा विश्व स्तर पर महिलाओं की घटती संख्या के  संदर्भ में ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट 2020 (State of the World Population 2020) रिपोर्ट जारी की गई है। 

स्टेट ऑफ द वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट 2020
स्टेट ऑफ द वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट 2020

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोषUnited Nations Population Fund

  • UNFPA संयुक्त राष्ट्र की यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी है।
  • इसे वर्ष 1967 में ट्रस्ट फंड के रूप में स्थापित किया गया था, इसका परिचालन वर्ष 1969 में शुरू हुआ।
  • वर्ष 1987 में इसे आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष नाम दिया गया।
  • हालाँकि, इसका संक्षिप्त नाम UNFPA (जनसंख्या गतिविधियों के लिये संयुक्त राष्ट्र कोष) को भी बरकरार रखा गया।
  • UNFPA का जनादेश संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council- ECOSOC) द्वारा स्थापित किया गया है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र महासभा का एक सहायक अंग है।
  • UNFPA पूरी तरह से अनुदान देने वाली सरकारों, अंतर-सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्रों, संस्थानों और व्यैक्तिक स्वैच्छिक योगदान द्वारा समर्थित है, न कि संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट द्वारा।
  • UNFPA प्रत्यक्ष रूप से स्वास्थ्य पर सतत् विकास लक्ष्य नंबर 3, शिक्षा पर लक्ष्य 4 और लिंग समानता पर लक्ष्य 5 के संबंध में कार्य करता है।

NOTE: ECOSOC

  • आर्थिक और सामाजिक परिषद सतत विकास के तीन आयामों – आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण – को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के केंद्र में है।
  • यह नवोन्मेषी सोच को बढ़ावा देने, आगे के तरीकों पर आम सहमति बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों के समन्वय का केंद्रीय मंच है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सम्मेलनों और शिखर सम्मेलनों के लिए भी जिम्मेदार है।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर ने 1945 में संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य अंगों में से एक ECOSOC की स्थापना की।

संयुक्त राष्ट्र का एजेंडा 2030 (17 विकास लक्ष्य)

  1. गरीबी के सभी रूपों की पूरे विश्व से समाप्ति।
  2. भूख की समाप्ति, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा।
  3. सभी आयु के लोगों में स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा।
  4. समावेशी और न्यायसंगत गुणवत्तायुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही सभी को सीखने का अवसर देना।
  5. लैंगिक समानता प्राप्त करने के साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त करना।
  6. सभी के लिये स्वच्छता और पानी के सतत् प्रबंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  7. सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच सुनिश्चित करना।
  8. सभी के लिये निरंतर समावेशी और सतत् आर्थिक विकास, पूर्ण और उत्पादक रोज़गार तथा बेहतर कार्य को बढ़ावा देना।
  9. लचीले बुनियादी ढाँचे, समावेशी और सतत् औद्योगीकरण को बढ़ावा।
  10. देशों के बीच और भीतर असमानता को कम करना।
  11. सुरक्षित, लचीले और टिकाऊ शहर और मानव बस्तियों का निर्माण।
  12. स्थायी खपत और उत्पादन पैटर्न को सुनिश्चित करना।
  13. जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिये तत्काल कार्रवाई करना।
  14. स्थायी सतत् विकास के लिये महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और उपयोग।
  15. सतत् उपयोग को बढ़ावा देने वाले स्थलीय पारिस्थितिकीय प्रणालियों, सुरक्षित जंगलों, भूमि क्षरण और जैव-विविधता के बढ़ते नुकसान को रोकने का प्रयास करना।
  16. Sustainable Development के लिये शांतिपूर्ण और समावेशी समितियों को बढ़ावा देने के साथ ही साथ सभी स्तरों पर इन्हें प्रभावी, जवाबदेह पूर्ण बनाना ताकि सभी के लिये न्याय सुनिश्चित हो सके।
  17. सतत् विकास के लिये वैश्विक भागीदारी को पुनर्जीवित करने के अतिरिक्त कार्यान्वयन के साधनों को मजबूत बनाना।

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NOTE :
  • वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की 70वीं बैठक में ‘2030 सतत् विकास हेतु एजेंडा’ के तहत सदस्य देशों द्वारा
    • 17 विकास लक्ष्य अर्थात् एसडीजी (Sustainable Development goals – SDGs) तथा 169 प्रयोजन अंगीकृत किये गए हैं।
  • ‘पर्यावरण तथा विकास पर विश्व आयोग’ (1983) के अंतर्गत बर्टलैंड कमीशन द्वारा जारी रिपोर्ट (1987) के अनुसार
    • ‘आने वाली पीढ़ी की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किये बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु विकास ही सतत् विकास है।’
  • SDG, यूएनडीपी की निगरानी व संरक्षण में ये अगले 15 सालों तक प्रभावी रहेंगे।
  • संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख SDG, लक्ष्य प्राप्ति कार्य करने वाली संस्था यूएनडीपी विश्व के 170 देशों में इन लक्ष्यों की प्राप्ति पर नजर रखेगी।

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