गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन कानून, 2019 : आतंकी का लेबल हटवाने के लिए क्या करना पड़ेगा?

गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन कानून, 2019

हाल ही में कुछ लोगों पर UAPA के तहत केस दर्ज किया गया है |

  • UAPA लोकसभा में 24 जुलाई 2019 में लाया गया फिर राज्यसभा में दो अगस्त 2019 को पास किया गया|
    • अब ये कानून बन गया है| 
  • सरकार के इसका उद्देश्य बढ़ते आतंकवाद पर लगाम कसना बताया है | 
  • ये कानून राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकार में वृद्धि करता है | 
  • आतंकी का लेबल हटवाने के लिए भी कोर्ट की बजाय सरकार की समीक्षा समिति के पास जाना पड़ेगा|
    • इसके निर्णय को अदालत में चुनौती दी जा सकती है |

अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट(UAPA),1967 – गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन कानून, 2019

गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन कानून, 2019
UAPA गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन कानून, 2019

पृष्ठभूमि 

  • यह कानून भारत की संप्रभुता और एकता को ख़तरे में डालने वाली गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था।
  • गैर-कानूनी गतिविधियों से तात्पर्य उन गतिविधियों से है जो किसी व्यक्ति/संगठन द्वारा देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को भंग करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
  • यूएपीए की धारा 43 के अध्याय IV और अध्याय VI के अनुसार डीएसपी या समकक्ष के पद से नीचे के अधिकारी यूएपीए के तहत अपराधों की जांच करने के लिए सक्षम नहीं है।
    • एनआईए को डीएसपी की कमी का सामना करना पड़ रहा है और मामलों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।
  • यह कानून
    • संविधान के अनुच्छेद-19 द्वारा प्रदत्त वाक् व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,
    • शस्त्रों के बिना एकत्र होने के अधिकार और
    • संघ बनाने के अधिकार पर युक्तियुक्त प्रतिबंध आरोपित करता है।
  • राष्ट्रीय एकता परिषद द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रवाद पर समिति ने उपरोक्त मौलिक अधिकारों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने का अनुमोदन किया।
  • इस कानून में वर्ष 2004, 2008 ,2012  और 2019 में संशोधन किया जा चुका है।

गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन कानून, 2019 – UAPA

  • इसका उद्देश्य आतंक से संबंधित अपराधों की त्वरित जाँच |
    • आतंकी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान करना।
    • शहरी माओवादियों सहित भारत की सुरक्षा एवं संप्रभुता के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न लोगों पर कठोर कार्रवाई |
  • यह कानून उचित प्रक्रिया तथा पर्याप्त सबूत के आधार पर ही किसी को आतंकवादी ठहराने की अनुमति देता है।
    • गिरफ्तारी या ज़मानत प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
  • यूएपीए की धारा 25 के अनुसार, आतंकवाद की कार्यवाही का प्रतिनिधित्व करने वाली संपत्ति को केवल उस राज्य के डीजीपी द्वारा लिखित अनुमोदन के साथ जप्त किया जा सकता है, जिसमें ऐसी संपत्ति स्थित है।
    • कई बार आतंकी विभिन्न राज्यों में अपनी संपत्ति रखते हैं।
    • ऐसे मामलों में अलग-अलग राज्यों के डीजीपी की मंजूरी लेना बहुत मुश्किल हो जाता है और जिसके कारण होने वाली देरी से अभियुक्तों की संपत्ति आदि को स्थानांतरित किया जा सकता है।
    • इसलिए जल्द से जल्द आतंकवाद की कार्यवाही का प्रतिनिधित्व करने वाली संपत्तियों को जप्त करना आवश्यक है।
    • यह कानून डीजी एनआईए को ऐसी संपत्ति को जब्त करने का अधिकार देता है जो एनआईए द्वारा की जा रही जांच के संबंध में आतंकवाद की आय का प्रतिनिधित्व करती है।
  • वर्तमान में एनआईए के पास 57 स्वीकृत पदों के मुकाबले 29 डीएसपी और 106 स्वीकृत पदों के मुकाबले 90 निरीक्षक हैं।
    • एनआईए के निरीक्षकों ने इन अपराधों की जांच करने के लिए पर्याप्त प्रवीणता हासिल कर ली है |
    • इस खंड में कानून यूएपीए के अध्याय IV और अध्याय VI के तहत दंडनीय अपराधों की जांच के लिए एनआईए के निरीक्षकों को सक्षम बनाने के लिए किए जा रहे हैं।
  • इस कानून में परमाणु आतंकवाद के कृत्यों के दमन हेतु अंतरराष्ट्रीय कंवेंशन (2005) को सेकेंड शिड्यूल में शामिल किया गया है।

UAPA अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट 2019 कानून की आवश्यकता

  • इससे पहले किसी भी कानून में किसी को व्यक्तिगत आतंकवादी कहने का कोई प्रावधान नहीं था।
    • जब किसी आतंकवादी संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो उसके सदस्य एक नया संगठन बना लेते हैं।
  • जब कोई व्यक्ति आतंकी कार्य करता है या आतंकी गतिविधियों में भाग लेता है तो वह आतंकवाद को पोषित करता है।
    • वह आतंकवाद को बल देने के लिये धन मुहैया कराता है अथवा आतंकवाद के सिद्धांत को युवाओं के मन में स्थापित करने का काम करता है।
    • आतंकवाद के साहित्य को या उसकी थ्योरी को युवाओं के मन में भरने काम करता है |
    • ऐसे दोषी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करना आवश्यक है।

UAPA 2019 कानून से संबंधित प्रमुख चिंताएँ

  • यह कानून, सरकार को किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया का पालन किये बिना आतंकी घोषित करने का अधिकार देता है
    • जिससे राजनैतिक द्वेष अथवा किसी अन्य दुर्भावना के आधार पर दुरुपयोग की आशंका बनी रहेगी।
  • इस कानून में आतंकवाद की निश्चित परिभाषा नहीं है |
  • इस कानून का अल्पसंख्यकों के विरुद्ध दुरुपयोग किया जा सकता है।
  • यह कानून किसी आतंकी घटना की निष्पक्ष जाँच को प्रभावित कर सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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