World Happiness Report UPSC

वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट 2020 (World Happiness Report UPSC Hindi)

  • इसमें भारत का स्थान 144वाँ है जो 2019 से 4 स्थान कम है।
  • यह रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष सतत् विकास समाधान नेटवर्क द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
  • सतत् विकास समाधान नेटवर्क (SDSN), संयुक्त राष्ट्र के तत्त्वावधान में वर्ष 2012 से काम कर रहा है।
  • इसमें 153 देशों को शामिल किया है।संयुक्त राष्ट्र ने 20 मार्च को विश्व खुशहाली दिवस घोषित किया था। 
  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा ख़ुशी के स्तर को मापने के लिए 6 कारकों को आधार बनाया गया है।
  • ये कारक हैं- प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, सामाजिक सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा भ्रष्टाचार और उदारता। 
  • सबसे खुशहाल देशों में फ़िनलैंड शीर्ष पर, दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमश: डेनमार्क एवं स्विटज़रलैंड हैं।
  • पड़ोसी देश पाकिस्तान 66वें, चीन 94वें, बांग्लादेश 107वें, नेपाल 92वें, मालदीव 87वें स्थान पर है।
वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट 2020  (World Happiness Report UPSC)
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वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट 2020  (World Happiness Report- 2020)
Happiness Report- 2020
वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट 2020  (World Happiness Report- 2020)
India- Happiness Report- 2020

नोट :
पहली बार इस संस्था ने दुनिया के शहरों की भी रैंकिंग किया है |
यह रैंकिंग ‘द इकोनॉमिस्ट’ (The Economist’s) द्वारा जारी ‘ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स’ से अलग है|

दुनिया के शहरों से संबंधित तथ्य(World Happiness Report UPSC Hindi) :  

  • दुनिया की आधी से अधिक आबादी (55.3 प्रतिशत) अर्थात लगभग 4.2 बिलियन लोग, आज शहरी क्षेत्रों में रह रहे हैं।
  • 2045 तक यह आंकड़ा 1.5 गुना बढ़कर 6 अरब से अधिक होने का अनुमान है।
  • 20वीं सदी तक एक मिलियन से अधिक निवासियों वाले 371 शहर थे।
  • 2018 में 548 शहर है और 2030 तक यह अनुमान है कि कम से कम एक मिलियन निवासी वाले 706 शहर होंगे।
  • इसी दौरान तथाकथित मेगा शहरों की संख्या (दस मिलियन से अधिक निवासियों वाले शहर) जिनमें से अधिकांश ग्लोबल साउथ में स्थित हैं अर्थात एशिया और अफ्रीका में सबसे तेज वृद्धि के साथ 33 से 43 तक बढ़ने की उम्मीद है।
  • आज, टोक्यो (37.4 मिलियन), नई दिल्ली (28.5 मिलियन), और शंघाई (25.6 मिलियन निवासी) दुनिया भर में सबसे अधिक आबादी वाले शहर हैं।
  • किसी भी देश में शहर आर्थिक इंजन होता हैं अर्थात दुनिया भर में 80 प्रतिशत से अधिक जीडीपी शहरों के  भीतर उत्पन्न होती है।

तीव्र शहरीकरण की चुनौतियाँ

  • तीव्र शहरीकरण, चुनौतियाँ भी पैदा करता है जैसे अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लगभग एक बिलियन शहरी ग़रीबों में किफायती आवास की कमी, आपराधिक गतिविधि के भेद्य ।
  • आंतरिक शहरों में सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना की कमी के परिणामस्वरूप भीड़ और अक्सर प्रदूषण का स्तर खतरनाक होता है।
  • 2016 में ,एक अनुमान के अनुसार 90 प्रतिशत शहरवासी असुरक्षित हवा में सांस ले रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप अप्रत्यक्ष तौर पर वायु प्रदूषण के कारण 4.2 मिलियन मौतें हुई हैं।
  • दुनिया की ऊर्जा खपत का लगभग दो-तिहाई और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 70 प्रतिशत से अधिक शहरों में  है।
  • तीव्र शहरीकरण और अकुशल भूमि उपयोग, जैव विविधता के नुकसान में योगदान करते हैं।
  • तीव्र शहरीकरण, सार्वजनिक स्थानों जैसे पार्क और शहर के हरे भरे क्षेत्रों पर भी दबाव डालता है, जो सामाजिक संपर्क और महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिए स्थान प्रदान करते हैं।

द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट

द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के अंतर्गत, ‘ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स’ में शहरों को पांच प्रमुख मानदंडों के आधार पर मापा जाता है:

  • स्थायित्व (Stability)
  • संस्कृति एवं पर्यावरण (Culture and Environment)
  • स्वास्थ्य देखभाल (Healthcare)
  • शिक्षा (Education)
  • आधारभूत अवसंरचना (Infrastructure)
  • द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट
    • यह यूनिट कंपनी द इकोनॉमिस्ट ग्रुप का शोध एवं विश्लेषण प्रभाग है।
    • इसे वर्ष 1946 में बनाया गया था।
    • इसका प्रमुख कार्य पूर्वानुमान और सलाहकारी सेवाएँ प्रदान करना है।
    • इसका मुख्यालय लंदन में है।

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