परमाणु अप्रसार संधि में 191 सदस्य देश

परमाणु अप्रसार संधि में 191 सदस्य देश

  • इस संधि में एक प्रस्तावना के अतिरिक्त 11 अनुच्छेद शामिल हैं और यह 5 मार्च, 1970 से लागू हुई।
  • एनपीटी या परमाणु अप्रसार संधि ,
    • परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और
    • परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है |
  • अब तक 191 सदस्य देश मुहर लगा चुके हैं जिनमें पांच परमाणु हथियार संपन्न देश भी शामिल हैं|
  • इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों पाँच देशों तक सीमित रखना था |
  • यह पाँच देश थे-अमरीका, सोवियत संघ (आज का रूस), चीन, ब्रिटेन और फ़्रांस |
  • हालाँकि चीन और फ़्रांस ने इस संधि पर 1992 तक हस्ताक्षर नहीं किए थे | 
  • यह पाँच ‘परमाणु हथियार संपन्न’ राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य हैं |
  • इस संधि के तहत ‘ग़ैर-परमाणु’ देशों को न तो यह हथियार देंगे और न ही इन्हें हासिल करने में उनकी मदद करेंगे|

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हस्ताक्षर कर्ता 

  • इस पर हस्ताक्षर करने वालों ने इस बात पर सहमति ज़ाहिर की है कि वे न तो इस तरह के हथियार विकसित करेंगे और न ही उन्हें प्राप्त करने की कोशिश करेंगे | 
  • ये शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित कर सकते हैं
    • लेकिन वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों की देखरेख में होगा| 
  • इस संधि के अनुसार जिन देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं,
    • उन्हें परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए भी किसी देश द्वारा परमाणु सामग्री का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता है।

यूएन अवर महासचिव नाकामित्सु (30 March 2020)

 परमाणु अप्रसार संधि में 191 सदस्य देश: यूएन अवर महासचिव नाकामित्सु
परमाणु अप्रसार संधि में 191 सदस्य देश: यूएन अवर महासचिव नाकामित्सु
  • यूएन अवर महासचिव नाकामित्सु ने
    • परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) को अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा का एक मज़बूत स्तम्भ बताते हुए कहा कि यह निशस्त्रीकरण, शस्त्र नियंत्रण और परमाणु अप्रसार के प्रयासों की अहमियत का उदाहरण है| 
  • “सुरक्षा संधियों के अलावा बहुत कम ऐसी बहुपक्षीय संधियां हैं जो एनपीटी की सफलता के रिकॉर्ड की बराबरी कर सकती हैं |पचास सालों से इसने सभी सदस्य देशों को सुरक्षा लाभ प्रदान किया है|”
  • ‘2020 एनपीटी समीक्षा सम्मेलन’ इस संधि के लागू होने के पचास वर्ष और इसकी अवधि अनिश्चितकालीन रूप से बढ़ा जाने के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित किया जाना है | 

परमाणु अप्रसार संधि में 191 सदस्य देश: परमाणु हथियारों की होड़ ( आज का परिदृश्य )

  • वर्ष 1970 के बाद पहली बार अनियंत्रित परमाणु होड़ की छाया दुनिया के ऊपर मंडरा रही है |
  • परमाणु हथियारों के लिए अब एक नए प्रकार की दौड़ देखने को मिल रही है –
    • जिसमें हथियारों की संख्या के बजाय तेज़ गति, गोपनीयता और अचूकता पर ज़ोर है |

“परमाणु आयामों को समेटे क्षेत्रीय हिंसक संघर्ष और ख़राब हो रहे हैं और अप्रसार की चुनौती कम नहीं हुई है|”

यूएन अवर महासचिव नाकामित्सु
  • उन्होंने कहा कि समीक्षा सम्मेलन की सफलता के लिए यह ज़रूरी है कि इन सभी मुद्दों व चुनौतियों पर रचनात्मक बहस हो | 
  • इसके लिए उन्होंने विचार-विमर्श में इन अहम बिंदुओं पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया है:
    • संधि के प्रति संकल्प को पुरज़ोर ढंग से फिर प्रकट किया जाए
    • परमाणु हथियारों का इस्तेमाल ना करने के मानदंडों के प्रति पुन: संकल्प लिया जाए
    • जोखिम घटाने के लिए कार्रवाई का एक पुलिंदा तैयार किया जाए जिससे दुनिया को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना से दूर और परमाणु निशस्त्रीकरण की दिशा में ले जाया सके |
    • परमाणु अप्रसार की चुनौतियों के बदलते रूपों की शिनाख़्त हो और उसके अनुरूप तंत्रों में बदलाव की अहमियत को समझा जाए
    • बदलती दुनिया में निशस्त्रीकरण, अप्रसार और शस्त्र नियंत्रण के लिए दूरदर्शितापूर्ण उपायों को अपनाया जाए

परमाणु अप्रसार संधि में 191 सदस्य देश: अब तक का अनुभव

  • भारत, पाकिस्तान और इजराइल ने इस पर दस्तख़त नही किए हैं |
  • इस संधि की कई उपलब्धियाँ हैं:
    • दक्षिण अफ्रीका और लगभग समूचे लातिन अमरीका ने परमाणु हथियार से संबद्ध सभी गतिविधियों का त्याग कर दिया है| 
    • दक्षिण अफ्रीका ने 1980 के दशक में गुप्त रूप से हथियार बनाए लेकिन 1991 में उसने उन्हें नष्ट कर दिया और वह एनपीटी का सदस्य बन गया| 

भारत व परमाणु अप्रसार संधि

  • भारत ने 1974 और 1998 में दो बार परमाणु बम परीक्षण किए हैं। 
  • इन परीक्षणों के बाद परमाणु सामग्री और तकनीक के मामले में भारत को काफी दिक्कतें का सामना करना पड़ा क्योंकि तमाम देशों ने उस पर प्रतिबंध लगा दिए थे। 
  • भारत-अमेरिकी नागरिक परमाणु समझौते के बाद से भारत पर से प्रतिबंध हटा लिए गए हैं। 
  • न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी भारत पर से सभी प्रतिबंध हटा लिए हैं। 
  • इसके लिए भारत को परमाणु अप्रसार संधि पर भी हस्ताक्षर नहीं करने पड़े है|  
  • इस समझौते के लिए भारत को आईएईए के सेफगार्ड मैकेनिज्म में शामिल होना पड़ा है और इस बात का आश्वासन भी देना पड़ा है कि भविष्य में वह किसी भी तरह का परमाणु परीक्षण नहीं करेगा|
  • इससे देश में नाभिकीय बिजली उत्पादन का रास्ता प्रशस्त हो गया है।

भारत परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से इंकार करता है :

  • भारत परमाणु अप्रसार संधि के स्थान पर वैश्विक परमाणु निशस्त्रीकरण की बात करता है।
  • उसका ऐसा विश्वास है कि बिना निशस्त्रीकरण के दुनिया से परमाणु हथियारों को खत्म नहीं किया जा सकता है।
  • एनपीटी भेदभावपूर्ण है और यह परमाणु हथियार सम्पन्न राष्ट्रों को तो आगे परीक्षण व विकास की अनुमति देता है लेकिन जिन लोगों के पास ये हथियार नहीं हैं उन्हें इनके विकास की इजाज़त नहीं देती है।
  • भारत के इस संधि पर न हस्ताक्षर करने के पीछे एक राजनीतिक कारण भी है।
  • भारत, चीन व पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से घिरा हुआ है जिनके साथ उसके कई युद्ध हो चुके हैं। 

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एनपीटी से आप क्या समझते हैं?

परमाणु अप्रसार संधि (Treaty on the Non-Proliferation of Nuclear Weapons)

परमाणु निरस्त्रीकरण क्या है?

एनपीटी या परमाणु अप्रसार संधि , परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है |

परमाणु अप्रसार संधि कब अस्तित्व में आया?

5 मार्च, 1970

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