Noble Prize in Economics (अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार)

Noble Prize in Economics को जीतने वालों का नाम है :अभिजीत बनर्जी ,एस्थर डुफ्लो ,माइकल क्रेमर |

Nobel prize in economics
Esther Duflo and Abhijit Banerjee, two of the three winners of the 2019 Nobel prize in economics. ‘A number of precedents are being broken or tested by this welcome decision.’ Photograph: Brian Snyder/Reuters

इन लोगों को, अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार (Noble Prize in Economics), वैश्विक गरीबी को कम करने वाले तरीके के कारण मिला है | इस तरीके को नाम दिया गया है : “वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए प्रयोगात्मक दृष्टिकोण” | अलग-अलग मानकों को सुधारने के लिए, गरीब बच्चों पर कई तरह के प्रयोग किये गए है जैसे : शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए इन्होंने अलग -अलग चीजों में बदलाव करके परिणाम का विश्लेषण किया | इनमे  

  1. किताबों की उपलब्धता 
  2. स्कूल में भोजन की सुविधा 
  3. स्कूल में बच्चों को जवाबदेह अध्यापक आदि में बदलाव किया | 

इसके बाद, इन्होंने पाया कि पहले दो तरीकों में परिवर्तन (जैसे सभी को किताब उपलब्ध कराना ) से कोई खास फर्क उनके सीखने में नहीं पड़ा था |तीसरे तरीके में बदलाव से उन्होंने बच्चों में काफी सुधार पाया | इस तरह के प्रयोग मुख्यतः भारत और अफ्रीका में किया गए थे | 

इसी तरह के प्रयोग बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए किया गया था | इसमें भी अलग-अलग तरीके अपनाए  गए थे जैसे 

  1. बच्चों को सस्ती दवाईयाँ उपलब्ध कराना 
  2. दवाईयाँ  तक पहुँच सुलभ/आसान करना 
  3. फ्री दवाईयाँ के साथ बेहतर पहुँच सुनिश्चित करना आदि 

इसके बाद, इन्होंने पाया कि पहले दो तरीकों की अपेक्षा तीसरे तरीके से काफी बेहतर परिणाम मिला था | इसी तरह और मानकों को बेहतर स्तर पर पहुँचाने के लिए उपरोक्त तरीके अपनाए  गए और सबसे उपयुक्त तरीके की खोज की गयी जिससे वैश्विक स्तर पर इन मानकों पर सुधार किया जा सके | इसी तरीके को “वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए प्रयोगात्मक दृष्टिकोण” कहा गया है | 

अगर ये प्रयोगात्मक दृष्टिकोण बेहतर साबित होता है तो निम्न स्थिति में परिवर्तन लाया जा सकता है जो मानवीय दृष्टिकोण से काफी बड़ी उपलब्धता होगी क्योंकि आज भी दुनिया में  

  1. 700 मिलियन से अधिक लोग अभी भी बहुत कम आय पर निर्वाह करते हैं। 
  2. हर साल, पाँच लाख बच्चे अपने पाँचवें जन्मदिन से पहले मर जाते हैं, अक्सर ऐसे रोगों से, जिन्हें अपेक्षाकृत सस्ते और सरल उपचारों से रोका या ठीक किया जा सकता है। 
  3. आधे बच्चे अभी भी बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कौशल के बिना स्कूल छोड़ते हैं।
https://bhugolias.in/noble-prize-in-physics/bhugolias/
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