Noble Prize in Physics

Noble Prize in Physics के वैज्ञानिकों के नाम हैं : जेम्स  पीबल्स (अमेरिकी अंतरिक्ष वैज्ञानिक) और स्विट्ज़रलैंड के मिशेल मेयर व डिडियर  क्यूलोज | 

मिशेल मेयर व डिडियर  क्यूलोज ने 1995 में एक वाह्य ग्रह की खोज की थी जो अपने तारे की परिक्रमा कर रहा है |  यह ग्रह हमारे सौरमंडल के बाहर अवस्थित है | इसे एक्सोप्लैनेट कहते हैं | यहां 2 शब्द का उपयोग हो रहा है : ग्रह और वाह्य ग्रह |  वह खगोलीय पिंड जो अपने तारे की परिक्रमा करता है उसे ग्रह की श्रेणी में रखा जाता है | जो खगोलीय पिंड हमारे सौरमंडल के बाहर अपने तारे की परिक्रमा कर रहा है उसे वाह्य ग्रह कहते हैं |  

अभी तक अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन द्वारा 88 नक्षत्रमंडल की पहचान की गई है |  इसी में से कुछ नक्षत्रमंडल से हमारी आकाशगंगा में भी है अर्थात सभी नक्षत्रमंडल हमारे आकाशगंगा(मंदाकिनी ) के भाग नहीं हैं |  नक्षत्र मंडल तारों की एक काल्पनिक आकृति को कहते हैं जो विभिन्न तारों को काल्पनिक रेखा द्वारा जोड़कर बनाई जाती है | इन्हीं 88  नक्षत्रमंडल में से एक पेगासस नक्षत्रमण्डल है | यह नक्षत्रमंडल मुख्यतः 4 तारों से बनी आकृति है परंतु इसमें लगभग 11 से 17 तारे हैं |  इसी तारों के समूह में ‘51 पेगासी’ नामक एक तारा है जो हमारे सूर्य के समान है क्योंकि इस तारे की परिक्रमा एक ग्रह करता है | यह पहला तारा खोजा गया था जिस की परिक्रमा ग्रह कर रहा है |  इसका नाम ‘51 पेगासी b’ भी रखा गया है | यह हमारी पृथ्वी से लगभग 50 प्रकाश वर्ष की दूरी पर अवस्थित है | यह गैस का एक गोला है जैसे बृहस्पति है | यह अपने तारे की परिक्रमा 4 दिन में पूरा करता है |  नासा के अनुसार, उसके बाद से(1995 ) अब तक (2019 ) लगभग 4073 वाह्य ग्रह खोजे जा चुके हैं|  

जेम्स पीबल्स को भौतिकी में Noble Prize in Physics का आधा हिस्सा मिलेगा |  इनकी खोज से बहुत सारे सवालों के जवाब मिल गए और कुछ ग़लतफ़हमियाँ भी दूर हुई |  जब बिग-बैंग(13.77 अरब वर्ष पहले ) हुआ था उसके लगभग 300000 साल बाद आकाश साफ हुआ था और प्रकाश पूरे अंतरिक्ष में फैलने लगा |  इस प्रकाश को कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (cosmic microwave background (CMB)) कहते हैं | यह आज भी चारों दिशाओं में भ्रमण कर रहा है |  इसी प्रकाश से हमें पता चलता है कि बिग-बैंग 13.77 अरब वर्ष पहले हुई थी | जेम्स पीबल्स ने इसी प्रकाश के तापमान के माप के यह बताया था कि बिग-बैंग के समय कितना पदार्थ बना होगा और कैसे पदार्थों से आकाशगंगाएँ  बनी | इसके बाद उन्होंने बताया कि जितना पदार्थ हमें दिख रहा है उतने पदार्थ के गुरुत्वाकर्षण बल से इस ब्रह्मांड को जोड़ कर नहीं रखा जा सकता है | इससे पहले यही माना जा रहा था कि जो पदार्थ दिख रहे हैं और अदृश्य न्यूट्रिनो के प्रभाव ने अंतरिक्ष को बांधे रखा हैं परंतु पीबल्स ने CMB  के विश्लेषण से पता लगाया कि इस अंतरिक्ष को एक साथ रखने के लिए जो गुरुत्वाकर्षण बल की आवश्यकता है उसका मात्र 3 से 4% इन पदार्थों से मिलता है | शेष बल किसी और चीज से मिल रहा है | इसी को डार्क मैटर और डार्क एनर्जी कहते हैं | यह पदार्थ हमारे चारों तरफ है और पूरे अंतरिक्ष में है |  परंतु इसको आज तक किसी भी माध्यम से देखा नहीं गया है | इसके होने का प्रमाण हमें गुरुत्व के साथ इसके संपर्क होने से मिलता है | यह एक बहुत बड़ी खोज है जो आज तक ब्रह्मांड को समझने में उपयोगी साबित हो रहा है |

तीनों वैज्ञानिकों को यह सम्मान स्टॉकहोम में दस दिसंबर को प्रदान किया जाएगा |  इस पुरस्कार की शुरूआत करने वाले वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबल की दस दिसंबर को पुण्यतिथि होती है जिनका निधन 1896 में हुआ था | 

2018 में भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार अमेरिका के आर्थर अश्किन, फ्रांस के गेरार्ड मोरोऊ और अमेरिका की डोना स्ट्रिकलैंड को दिया गया था |लेजर भौतिकी के क्षेत्र में नई तकनीक की खोज के लिए दिया गया था |

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