What is Universe in Hindi

What is Universe in Hindi: Bhugol की शुरुआत ब्रह्मांड को जानने से शुरू होती है और पृथ्वी के केंद्र तक चलती है | इस अध्याय में हम जानेंगे की हमारी पृथ्वी इस विशाल ब्रह्मांड में कहा स्थित है |

What is Universe in Hindi
What is Universe in Hindi

ब्रह्मांड की विशालता की कल्पना करना अत्यधिक कठिन है | आप जितना सोच सकते है वो सब ब्रह्मांड का हिस्सा है | अगर आप सोचते है कि ब्रह्मांड का कोई दूसरा छोर होगा या उसके आगे भी कुछ होगा या ब्रह्मांड के बाहर भी कुछ है तो मैं आप की जानकारी के लिए बता सकता हूँ कि अगर ऐसा कुछ हुआ तो वो भी ब्रह्मांड का ही हिस्सा कहा जायेगा | इसके आकार के सम्बन्ध के में हमे कोई जानकारी नहीं है, लेकिन फिर भी हम जानते  हैं कि हम सभी इसी ब्रह्माण्ड के हिस्सा हैं | ब्रह्मांड मुख्यतः तीन चीजों यथा डार्क मैटर (श्याम पदार्थ), डार्क एनर्जी(श्याम ऊर्जा) एवं एटम(अणु) से मिलकर बना है | हम जो कुछ देख सकते है जैसे सूर्य, पृथ्वी, तारे आदि सब अणु से बने है जो मात्र ४-६ % है| पहले दो पदार्थ ,जोकि ९४-९६% हिस्सा है, को देखा नहीं जा सकता है और ना ही ये किसी से क्रिया करते है | इनकी जानकारी हमें गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से चलती है | इसीलिए हम इसे श्याम पदार्थ और श्याम ऊर्जा के नाम से जानते है |

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इस ब्रह्मांड के अंदर लाखों आकाशगंगाएँ होने का अनुमान है | आकाशगंगाओं के समूह को सुपरक्लस्टर कहा जाता है |  हाल ही में नासा के हब्बल टेलीस्कोप से लगभग १०,००० आकाशगंगाओं को देखा गया है | सभी आकाशगंगाएँ ब्रह्मांड के केंद्र का चक्कर लगा रही है |  ये आकाशगंगाएँ भिन्न-भिन्न आकृति (जैसे अंडाकार , दीर्घवृताकार ,सर्पिलाकार होते है) और आकार (जैसे कोई आकाशगंगा १ लाख प्रकाश वर्ष तो कोई १० लाख प्रकाश वर्ष का होता है) के होते है | एक आकाशगंगा  गैस,धूल और लाखों तारों का एक समूह होता है जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण एक साथ रहता है | हमारी आकाशगंगा का नाम मन्दाकिनी है | रात के समय आसमान में जो तारे टिमटिमाते हुए दिखते है उनमें से अधिकतम  हमारी आकाशगंगा में स्थित है | एंड्रोमेडा हमारी आकाशगंगा के सबसे निकट की आकाशगंगा है ,जो हमारी आकाश गंगा से २३ लाख प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है | हमारी आकाशगंगा सर्पिलाकार की है | इसमें मुख्यतः चार घूर्णनशील भुजाएँ यथा नोर्मा, सगीतोरियस, पेर्सेउस और सिग्नस है | ये काल्पनिक भुजाएँ लाखों तारों के समूह और गैसों से बना है और इसमें नए तारे भी बनते रहते है | नोर्मा आर्म्स (भुजा) मन्दाकिनी आकाशगंगा  के केंद्र के सबसे पास है | इस आकाशगंगा के केंद्र को ऊपर से देखने पर यह आयताकार जैसा प्रतीत होता है | इसके केंद्र को गैलेक्टिक केंद्र (ब्रह्माण्ड केंद्र) कहते है | हमारा सौरमंडल सगीतोरियस और पर्सेउस भुजा के मध्य एक छोटी भुजा ओरियन पर स्थित है | सभी तारे मन्दाकिनी आकाशगंगा के केंद्र का चक्कर लगा रही है | हमारा सौरमंडल भी इसी केंद्र के चक्कर लगा रहा है | हमारा तारा ,जोकि सूर्य है, केंद्र का एक चक्कर लगाने में लगभग २३ करोड़ वर्ष लेता है | इसी को ब्रह्माण्ड वर्ष कहते है | इस आकाशगंगा को अगर एक छोर से दूसरे छोर तक सीधा माप निकाले तो ये लगभग १००००० प्रकाश वर्ष है | हमारा सूर्य केंद्र से लगभग २८-३० हज़ार प्रकाश वर्ष की दूरी  पर है | 

तारामंडल या नक्षत्रमंडल तारों से बनी एक  काल्पनिक आकृति होती है |अर्सा मेजर या बिग बीयर इसी प्रकार का एक नक्षत्रमंडल है | यह सात तारों का एक समूह है जो की नक्षत्रमंडल अर्सा मेजर का भाग है|    

अब सौरमंडल की बात करते है | निहारिका को सौरमंडल का जनक मन जाता है |  सूर्य(तारा ) ,आठ ग्रह ,६३ उपग्रह तथा लाखों खगोलीय पिंड जैसे क्षुद्र ग्रह(ग्रहों के टुकड़े ), धूमकेतु , उल्कापिंड एवं वृहत मात्रा में धूलकण व गैस मिलकर सौरमंडल का निर्माण करते है | सौरमंडल के केंद्र में सूर्य है| सूर्य में लगातार हाइड्रोजन से हीलियम बनने की रासायनिक  क्रिया चलती रहती है और ऊर्जा मुक्त होती रहती है | इसे नाभिकीय संलयन प्रक्रिया कहते है और सूर्य के ऊर्जा का मुख्य स्रोत यही नाभिकीय संलयन है | सूर्य में लगभग ७१% हाइड्रोजन, २६% हीलियम और अन्य तत्व ३% होते है | अगर सूर्य की संरचना की बात करे तो तापमान और दाब के आधार पर सूर्य को दो परतों में विभाजित किया जा सकता है : आंतरिक परत जिसमें कोर (केंद्र), रेडिएटिव जोन (विकिरण क्षेत्र), कन्वेक्टीव जोन (संवहनीय क्षेत्र) और वाह्य परत जिसमें फ़ोटोस्फ़ेयर (प्रकाश मंडल), क्रोमोस्फेयर (वर्णमण्डल), कोरोना होता है | जो सूर्य की परत हम देखते है वह प्रकाशमंडल है | कभी कभी प्रकाशमंडल के चुंबकीय क्षेत्र में बदलाव से बहुत बड़ी मात्रा में  विद्युत चुम्बकीय विकिरण उत्सर्जित होता है जो सूर्य की आकर्षण शक्ति को पार कर अंतरिक्ष में चला जाता है ,इसे हम सौर ज्वाला (सोलर फ्लेयर्स ) कहते है | सौर ज्वाला जहाँ से निकलता है वहाँ काले धब्बा सा दिखाई पड़ता है | इसे सौर कलंक कहा जाता है | अगर ये विकिरण हमारे वायु मंडल में प्रवेश कर जाये तो हमारी संचार व्यवस्था बाधित हो सकती है | काला धब्बा दिखाई पड़ने का कारण है कि धब्बे का तापमान आसपास के तापमान से कम होता है |अगर इस धब्बे को अंधेरे में देखे तो यह चंद्रमा से भी ज्यादा चमकता हुआ प्रतीत हो सकता है |     

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हमारे सौरमंडल में सम्पूर्ण ऊर्जा एवं प्रकाश का स्रोत सूर्य है |  सभी आठ ग्रह एक निश्चित पथ पर सूर्य का चक्कर लगते हैं | ये पथ दीर्घवृताकार में फैले हुए है | इस पथ को कक्षा कहते है |इन आठ ग्रहों में से बुध ,शुक्र , पृथ्वी ,मंगल भीतरी ग्रह कहलाते है क्योंकि ये सूर्य एवं छुद्रग्रहों की पट्टी के मध्य स्थित है | इन्हे पार्थिव ग्रह भी कहते है क्योंकि ये ग्रह पृथ्वी की भाँति ही शैलों एवं धातुओं से बने है और अपेक्षाकृत अधिक घनत्व वाले ग्रह हैं | अन्य चार ग्रह  बृहस्पति ,शनि ,यूरेनस(अरुण ) ,नेप्च्यून(वरुण ) गैस से बने विशाल ग्रह या जोवियन(बृहस्पति की तरह ) ग्रह कहलाते हैं |इनका वायुमंडल हाइड्रोजन व हीलियम से बना है | सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा पश्चिम से पूर्व की दिशा में कर रहे हैं परन्तु शुक्र व अरुण सूर्य के चारों ओर पूर्व से पश्चिम की दिशा में परिभ्रमण करते है | आकार में सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध है | सूर्य से दूरी के आधार पर आठों ग्रह का क्रम  इस प्रकार है : बुध ,शुक्र ,पृथ्वी ,मंगल , बृहस्पति ,शनि ,यूरेनस(अरुण ) , नेप्च्यून(वरुण ) | आकार के आधार पर आठों ग्रह का क्रम इस प्रकार है: बृहस्पति ,शनि ,यूरेनस(अरुण ) , नेप्च्यून(वरुण ) ,पृथ्वी , शुक्र ,मंगल, बुध | मंगल और बृहस्पति के मध्य एक क्षुद्र ग्रह की पट्टी पायी जाती है | ये भी सूर्य का परिक्रमा कर रहे है | हर ग्रह(बुध एवं शुक्र को छोड़कर) के पास अपना प्राकृतिक उपग्रह है जैसे पृथ्वी के पास एक उपग्रह है (चन्द्रमा) ,मंगल के पास दो उपग्रह है (फोबोस और डीमोस ) हैं | 

पृथ्वी और चन्द्रमा के बारे में हम क्रमशः  तीसरे और चौथे अध्याय में विस्तार से चर्चा किया जायेगा | 

प्रश्न :१ हमारा  सौर मंडल किस आकाशगंगा में पाया जाता है ?

प्रश्न :२ ब्रह्मांड वर्ष किसे कहते है ?

प्रश्न :३ खगोलीय पिंड किसे कहते हैं ?क्या कृत्रिम उपग्रह खगोलीय पिंड है ?

प्रश्न :४ सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पहुंचने में कितना समय लेता है ?

प्रश्न :५ तारा किसे कहते है ?

प्रश्न :६ आकाश नीला क्यों दिखाई देता है ? 

प्रश्न :७ कौन सा बल सौर मंडल को बाँधे रखने के लिए उत्तरदायी है ?

प्रश्न :८ क्या प्रकाश वर्ष समय का सूचक है ?

प्रश्न :९ एडविन हबल के बारे में क्या जानते है ?उनकी उपलब्धियाँ क्या-क्या हैं ?

प्रश्न :१० सौर पवने क्या है तथा यह हमारी संचार व्यवस्था को किस प्रकार से प्रभावित करता है ?

प्रश्न :११ क्षुद्र ग्रह और पुच्छल तारे के मध्य क्या अंतर है ?

प्रश्न :१२ ग्रह और तारे में क्या अंतर है ?

प्रश्न :१३ चन्द्रमा और  सूर्य में क्या अंतर है ?

प्रश्न :१४ हमारे सौरमंडल में टाइटन उपग्रह किस ग्रह की परिक्रमा करते है ?

प्रश्न :१५ गोल्डीलॉक्स क्षेत्र क्या है ?

प्रश्न :१६ सूर्य में ऊर्जा कैसे उत्पन्न होती है ? 

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