केन्द्रीय सांख्यिकीय कार्यालय और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय

केन्द्रीय सांख्यिकीय कार्यालय(CSO) और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (National Sample Survey Office)

केन्द्रीय सांख्यिकीय कार्यालय और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
  • प्रो. पी. सी. महालनोबिस को ‘भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली के जनक’ के रूप में जाना जाता है।
  • भारत सरकार ने 1999 में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का सृजन किया था।
  • यह मंत्रालय मुख्यतः दो विभागों की सहायता से संचालित किया जाता है।
    • पहला,सांख्यिकी विभाग या राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) और दूसरा,कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग।
  • इसके अलावा भारत सरकार ने 2005 में राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग(एन एस सी) की स्थापना(रंगराजन आयोग की सिफारिश) की है।
  • एन एस सी की स्थापना सांख्यिकीय मामलों में नीतियाँ तैयार करने,प्राथमिकताएं और मानक तय करने के उद्देश्य की गई है।

सांख्यिकी विभाग या राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के अंतर्गत मुख्यतः

  • केन्द्रीय सांख्यिकीय कार्यालय और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय आता है ।
    • केन्द्रीय सांख्यिकीय कार्यालय के मुख्य कार्य सकल घरेलू उत्पाद ,औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(प्रत्येक माह),अवसंरचना साख्यिकी, राष्ट्रीय आय लेखांकन, उद्योगों के वार्षिक औद्योगिक सर्वेक्षण का संचालन, ऊर्जा सांख्यिकी आदि पर राष्ट्रीय लेखा तैयार करना है।
    • राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय मुख्यतया प्रारंभिक डेटा, विभिन्‍न सामाजिक-आर्थिक विषयों पर ,राष्‍ट्रव्‍यापी स्‍तर पर घरों, का सर्वेक्षण, वार्षिक औद्योगिक सर्वेक्षण (एएसआई) आदि एकत्र किया जाता है। इन सर्वेक्षणों के अलावा, एनएसएसओ ग्रामीण और शहरी कीमतों से संबंधित डेटा एकत्र करता है ।

कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के अंतर्गत बीस सूत्री कार्यक्रम,आधारिक संरचना और परियोजना,सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना जैसे कार्य की निगरानी करनी होती हैं।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, भारतीय सांख्यिकीय संस्थान के लिए एक नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करता है। यह संस्थान 1959 में संसद के एक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा प्राप्त हुआ था।

सकल घरेलू उत्पाद क्या है?

यह एक निश्चित अवधि में देश में उत्पादित अंतिम माल और सेवाओं का बाजार मूल्य है। यह एक आर्थिक संकेतक है। भारत में जीडीपी की गणना हर तिमाही की जाती है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) क्या है?इससे क्या पता चलता है?

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) 1950 से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) से संबंधित आंकड़े एकत्र और प्रकाशित करता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) देश के 8 कोर क्षेत्रों में हर महीने के उत्पादन के उतार चढ़ाव को मापता है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के अंतर्गत निम्न 8 क्षेत्रों के आंकड़ों को मापा जाता है। ये क्षेत्र हैं:

  1. कोयला: इसका कुल भार 10.33% है।
  2. कच्चा तेल: इसका कुल भार 8.98% है।
  3. प्राकृतिक गैस: इसका कुल भार 6.88% है।
  4. रिफाइनरी उत्पाद: इसका कुल भार 28.04% है।
  5. स्टील: इसका कुल भार 17.92% है।
  6. सीमेंट: इसका कुल भार 5.37% है।
  7. उर्वरक: इसका कुल भार 2.63% है।
  8. बिजली: इसका कुल भार 19.85% है।

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