IAS PRELIMS 2019 QUESTION 12: व्याख्या

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 12: व्याख्या

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 12: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. दिल्ली सल्तनत के राजस्व प्रशासन में राजस्व वसूली के प्रभारी को ‘आमिल’ कहा जाता था।
  2. दिल्ली के सुल्तानों की इक्ता प्रणाली एक प्राचीन देशी संस्था थी।
  3. ‘मीर बख्शी’ का पद दिल्ली के ख़लजी सुल्तानों के शासनकाल में अस्तित्व में आया।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(a)केवल 1

(b)केवल 1 और 2

(c)केवल 3

(d)1, 2 और 3

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 12: व्याख्या

दिल्ली सल्तनत : आमिल

केन्द्र-प्रान्त (इक्ता)- जिला (शिक)-परगना (तहसील)-ग्राम

प्रान्तों को इक्ता कहा जाता था। भारत में इक्ता प्रथा की शुरुआत इल्तुतमिश ने की। इक्ता की परिभाषा निजामुलमुल्क की पुस्तक सियासत नाम में मिलता है। इक्ता इजारेदारी के लिये दिया गया भू-राजस्व क्षेत्र था जो सैनिक या असैनिक किसी को भी दिया जा सकता था। दिल्ली सुल्तानों में सबसे अधिक इक्ता मुहम्मद तुगलक के समय में थे। इक्ता के प्रमुख को इक्तादार या मुक्ता या वली कहा जाता था।

  • दिल्ली सल्तनत को छोटे प्रांतों में विभाजित किया गया था उन्हें इक्ता (IQTAS) कहा जाता था।
  • इक्ता का विभाजन शिक  में होता था। इस पर शिकदार नामक अधिकारी नियुक्त किये जाते थे।
  • शिक का विभाजन परगनों में होता था और इस पर आमिल नामक अधिकारी नियुक्त किए जाते थे।
  • इब्नबतूता एक और प्रशासनिक ईकाई की चर्चा करता है।
    • यह परगना के नीचे होता था।
    • यह 100 या 84 गाँवों का समूह होता था और इस पर चौधरी नामक अधिकारी नियुक्त किया जाता था।
    • 100 या 84 गाँवों के इस समूह को सदी कहा जाता था।
  • प्रशासन की सबसे छोटी ईकाई गाँव थी।

दिल्ली सल्तनत

  • सुल्तान के प्रशासनिक कार्यों में सहायता के लिए दो प्रमुख अधिकारी वजीर एवं अमीर होते थे।
  • सुल्तान के प्रशासनिक कार्यों में सहायता के लिए एक मंत्री परिषद होती थी जिसे मजलिस-ए-खलवत कहा जाता था।
  • मंत्री परिषद या मजलिस-ए-खलवत में चार विभाग अत्यन्त महत्वपूर्ण थे-
  1. दीवान-ए-विजारत : यह सबसे महत्वपूर्ण विभाग था। यह आर्थिक मंत्रालय की तरह था। इसका प्रमुख वजीर अथवा प्रधानमंत्री होता था।
  2. दीवान-ए-अर्ज : यह सैन्य विभाग था। इसकी स्थापना बलबन ने की थी।
  3. दीवाने-ए-रसालत : यह विदेश विभाग था।
  4. दीवाने-ए-इंशा : यह पत्राचार विभाग था।

सेना

  • सेना का संगठन मंगोलों की दशमलव प्रणाली पर किया गया था।
    • सर्वप्रथम इस प्रणाली के आधार पर अलाउद्दीन ने अपनी सेना संगठित की ।
  • दशमलव प्रणाली : दशमलव प्रणाली के आधार पर निम्नलिखित प्रकार से सेना संगठित की थी :
    • 10 सैनिकों पर एक सर-ए-खेला।
    • 10 सर-ए-खेल पर एक सिपहसालार।
    • दश सिपहसालार पर एक अमीर।
    • 10 अमीर पर एक मलिक।
    • 10 मलिक पर एक खान।

परगना का प्रशासन

  1. आमिल- दिल्ली सल्तनत के राजस्व प्रशासन में राजस्व वसूली के प्रभारी को ‘आमिल’ कहा जाता था।
  2. मुशरिफ
  3. हज़मदार- वित्त को नियंत्रण में रखते थे।
  4. काज़ी-सिविल अधिकारी, जिन्होंने विकासात्मक रिकॉर्ड बनाए रखा।
  5. शिकदार-आपराधिक अधिकारी और कानून निर्माता।
  6. कोतवाल-पुलिस प्रमुख : शिकदार के अधीन ।
  7. फौजदार-सैन्य अधिकारी, किले के साथ-साथ उनके निकटवर्ती क्षेत्रों के प्रभारी।
  8. अमीन- भूमि को मापने और उपयोग को आवंटित करने के लिए अधिकारी।
  9. कानूनगो- उत्पादन और मूल्यांकन के पिछले रिकॉर्ड को बनाए रखाना।
  10. पटवारी-ग्राम रिकॉर्ड को बनाए रखाना

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 12: व्याख्या :मुगल प्रशासन

  • मुगल प्रशासन सैन्य शक्ति पर आधारित एक केंद्रीकृत व्यवस्था थी।
  • मुगलोँ ने एक ऐसे साम्राज्य की स्थापना की जिस पर खलीफा जैसी किसी विदेशी सत्ता का कोई अंकुश नहीँ था।
  • मुगल कालीन राजत्व के सिद्धांत की स्पष्ट व्याख्या अबुल फजल ने आईन-ए-अकबरी मेँ की है।
  • मुग़ल सम्राट सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति तथा सर्वोच्च नयायाधीश था। वास्तव मेँ साम्राज्य की सारी शक्तियाँ सम्राट मेँ निहित होती थी।
  • केंद्रीय प्रशासन के चार प्रमुख स्तंभोँ (वजीर, मीर बख्शी, खान-ए-सामा और रुद्र-उस-सुदूर) थे।
  • वजीर राजस्वविभाग तथा बादशाह का प्रधानमंत्री होता था। सम्राट की अनुपस्थिति मेँ वह शासन के साधारण कार्योँ को बादशाह की और से देखता था।
  • मीर बख्शी : यह सैन्य प्रशासन की देखभाल, मनसब दारों का प्रधान, सैनिकोँ की भर्ती, हथियारोँ तथा अनुशासन का प्रभारी होता था।
  • खान-ए-सामा : राजमहल तथा कारखानो के अधिकारी होता था।
  • रुद्र-उस-सुदूर : यह धार्मिक मामलोँ का अधिकारी था। दान विभाग भी उसी के अंतर्गत था। रुद्र-उस-सुदूर को ‘शेख-उस-इस्लाम’ कहा जाता था।

मीर बख्शी

मीर बख्शी सैन्य विभाग का सर्वोच्च अधिकारी होता था। इस पद का विकास अकबर के काल में शुरू हुआ था।मीर बख्शी के प्रमुख कार्य- सैनिकों की भर्ती, उसका हुलिया रखना, रसद प्रबंध, सेना में अनुशासन रखना, सैनिकों के लिए हथियारों तथा हाथी – घोङों का प्रबंध रखना। इसके अतिरिक्त वह शाही महल की सुरक्षा का उत्तरदायित्व भी वहन करता था।

IAS Prelims Question Paper In Hindi

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