IAS PRELIMS 2019 QUESTION 6: व्याख्या

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 6: व्याख्या

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 6: निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए :

       आंदोलन/संगठन                           नायक (लीडर)

1. अखिल भारतीय अस्पृश्यता विरोधी लीग   :        महात्मा गाँधी

2. अखिल भारतीय किसान सभा                      :   स्वामी सहजानंद सरस्वती

3. आत्मसम्मान आंदोलन                               : ई० वी० रामास्वामी नायकर

उपर्युक्त में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?

a)केवल 1

b)केवल 1 और 2

c)केवल 2 और 3

d)1, 2 और 3

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 6: व्याख्या

अखिल भारतीय अस्पृश्यता विरोधी लीग / अस्पर्श्यता निवारण संघ (एंटी अन्टचेबल्टी लीग)

  • भारत में स्वाधीनता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी और डॉ भीमराव अम्बेडकर के बीच 25 सितम्बर 1932 को यरवदा जेल में पूना पैक्ट का गांधी सहित देश के हिन्दू नेताओं पर गहरा प्रभाव पड़ा। 
  • पूना पैक्ट के पश्चात गांधी एवं कांग्रेस का ध्यान अछूतों की ओर हुआ एवं उन्होंने अनुभव किया गया कि दलितों एवं हरिजनों की समस्याओं का हल करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय संगठन होना चाहिए। 
  • तब 30 सितम्बर 1932 को हरिजन सेवक संघ की स्थापना एक अखिल भारतीय संगठन के रूप में की गई।
    • हरिजन सेवक संघ एक अखिल भारतीय संगठन था, जिसका निर्माण गांधीजी ने हिन्दू समाज से अस्पर्श्यता मिटाने के लक्ष्य से किया था। 
  • पूर्व में इस संगठन का नाम ‘अस्पर्श्यता निवारण संघ’ (एंटी अन्टचेबल्टी लीग) और फिर ”सर्वेन्ट ऑफ़ अन्टचेबल्स सोसायटी” रखा गया था |
    • 13 सितम्बर 1933 को हरिजन सेवक संघ नाम दिया गया। 
    • हरिजन सेवा संघ का मुख्यालय गाँधी आश्रम, किंग्सवे कैम्प, दिल्ली में है।
    • इसकी शाखाएँ भारत में लगभग सभी राज्यों में हैं।
  • इसके प्रथम अध्यक्ष प्रसिद्ध उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला थे।

प्रमुख उद्देश्य

  • दलितों की निर्योग्यताओं को समाप्त करना।
  • हिन्दू समाज से सत्य एवं अहिंसा के माध्यम से अस्पर्श्यता को समाप्त करना।
  • दलितों के शैक्षणिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्तर का उन्नयन करना। 

अखिल भारतीय किसान सभा

भारत में संगठित किसान आंदोलन खड़ा करने का श्रेय स्वामी सहजानंद सरस्वती को जाता है | दण्डी संन्यासी होने के बावजूद सहजानंद ने किसानों को भगवान से बढ़कर बताया | उन्होंने किसानों को लेकर नारा भी दिया था :

‘जो अन्न-वस्त्र उपजाएगा, अब सो कानून बनायेगा

ये भारतवर्ष उसी का है, अब शासन वहीं चलायेगा’

स्वामी सहजानंद सरस्वती

महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ असहयोग आंदोलन बिहार में तेजी पकड़ी तो स्वामी जी उसके केन्द्र में थे | घूम-घूमकर उन्होंने अंग्रेजी राज के खिलाफ लोगों को खड़ा किया | इसी दौरान उन्होंने पाया कि भारत में किसानों की हालत गुलामों से भी बदतर है |

  • भारत के इतिहास में संगठित किसान आंदोलन खड़ा करने और उसका सफल नेतृत्व करने का एक मात्र श्रेय स्वामी सहजानंद सरस्वती को जाता है |
  • कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने किसानों को जमींदारों के शोषण और आतंक से मुक्त कराने का अभियान जारी रखा |
  • उनकी बढ़ती सक्रियता से घबराकर अंग्रेजों ने उन्हें जेल में डाल दिया था |
  • किसानों को हक दिलाने के लिए संघर्ष को अपना लक्ष्य मान लिया था |
    • जिसके बाद उन्होंने नारा दिया ‘कैसे लोगे मालगुजारी, लठ हमारा जिन्दाबाद’
  • 1936 में कांग्रेस के लखनऊ सम्मेलन में अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना हुई जिसमें उन्हें पहला अध्यक्ष चुना गया |

आत्मसम्मान आंदोलन

आत्मसम्मान आन्दोलन वर्ष 1920 में ई. वी. रामास्वामी नायकर द्वारा दक्षिण भारत में प्रारम्भ किया गया था।

  • ई. वी. रामास्वामी नायकर ,जो कि ‘पेरियार’ के नाम से प्रसिद्ध थे, ने इसकी शुरुआत की थी।
  • रामास्वामी नायकर ने हिन्दू रूढ़िवादिता का खण्डन किया।
  • वर्ष 1925 में नायकर ने अपना एक समाचार पत्र ‘कुदी-अरासु’ निकाला और एक उग्र समाज सुधारक के रूप में जाने गए।
  • नायकर पेरियार ने धर्म के साथ-साथ ब्राह्मणों के आधिपत्य और जाति प्रथा पर भी आक्रमण किया।
    • विधवा विवाह और परिवार नियोजन जैसे मुद्दों पर बल दिया।
  • ‘आत्म सम्मान लीग’ सन 1944 में ‘जस्टिस पार्टी’ के साथ मिलकर ‘द्रविड़कड़गम’ बनी।

आत्मसम्मान आंदोलन के उद्देश्य

  • समाज में आदमी-आदमी के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
  • आर्थिक विषमताओं को समाप्त किया जाना चाहिए।
  • भूमि और दूसरे संसाधनों का बंटवारा सामाजिक न्याय की भावना को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
  • जाति, धर्म, राष्ट्र, वर्ण और ईश्वर को लेकर जो भी भ्रम समाज में व्याप्त हैं, उन्हें पूरी तरह से समाप्त हो जाना चाहिए।
  • मनुष्य को उसके श्रम का पूरा लाभ मिलना चाहिए।
  • स्त्री-पुरुष के बीच सभी तरह के भेदभाव को खत्म होना चाहिए।
  • मनुष्य को किसी भी सूरत में किसी का भी दास नहीं होना चाहिए।
  • मनुष्य को अपने ज्ञान, तर्क, भावनाओं और विश्वासों के साथ जीवन जीने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

IAS Prelims Question Paper In Hindi

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