IAS PRELIMS 2019 QUESTION 7: व्याख्या

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 7: व्याख्या

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 7: निम्नलिखित में से कौन-सा एक हड़प्पा स्थल नहीं है?

a)चन्हुदड़ो

b)कोट दीजी

c)सोहगौरा

d)देसलपुर

IAS PRELIMS 2019 QUESTION 7: व्याख्या

हड़प्पा स्थल
हड़प्पा स्थल

सिंधु घाटी सभ्यता

  • प्रारंभिक हड़प्पाई सभ्यता (3300ई.पू.-2600ई.पू. तक)
  • परिपक्व हड़प्पाई सभ्यता (2600ई.पू-1900ई.पू. तक)
  • उत्तर हड़प्पाई सभ्यता (1900ई.पु.-1300ई.पू. तक)

सिंधु घाटी सभ्यता मिस्र,मेसोपोटामिया,भारत और चीन की चार सबसे बड़ी प्राचीन नगरीय सभ्यताओं से भी अधिक उन्नत थी। 1920 में, भारतीय पुरातत्त्व विभाग द्वारा किये गए सिंधु घाटी के उत्खनन से प्राप्त अवशेषों से हड़प्पा तथा मोहनजोदडो जैसे दो प्राचीन नगरों की खोज हुई। भारतीय पुरातत्त्व विभाग के तत्कालीन डायरेक्टर जनरल जॉन मार्शल ने सन 1924 में सिंधु घाटी में एक नई सभ्यता की खोज की घोषणा की।यह सभ्यता लगभग 2500 ईस्वी पूर्व दक्षिण एशिया के पश्चिमी भाग मैं फैली हुई थी,जो कि वर्तमान में पाकिस्तान तथा पश्चिमी भारत के नाम से जाना जाता है।

चन्हुदड़ो

  • चनहुदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता के नगरीय झुकर चरण से सम्बंधित एक पुरातत्व स्थल है।
  • यह क्षेत्र पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के मोहन जोदड़ो से 130 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
    • यह 4000 से 1700 ईशा पूर्व में बसा हुआ माना जाता है |
    • इस स्थान को इंद्रगोप मनकों के निर्माण स्थल के रूप में जाना जाता है।
  • यही एक मात्र ऐसा सैन्धव स्थल है जो दुर्गीकृत नहीं है।
  • चनहुदड़ो की पहली बार खुदाई मार्च 1930-31 में एन॰जी॰ मजुमदार ने करवाई और उसके बाद 1935-36 में अमेरीकी स्कूल ऑफ़ इंडिक एंड इरानियन तथा म्यूज़ियम ऑफ़ फाइन आर्ट्स, बोस्टन के दल ने अर्नेस्ट जॉन हेनरी मैके के नेतृत्व में करवाई।

कोटदीजी

कोटदीजी सिंध प्रांत ‘खैरपुर’ नामक स्थान पर स्थित प्राचीन सैंधव सभ्यता का एक केन्द्र था।

  • इस की खुदाई 20 वीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में हुई और आरंभिक हड़प्पा काल के अवशेषों के रूप में इसकी पहचान हुई।
  • इस बस्ती के चारों तरफ़ पत्थर से बनी दीवार थी, जो लगभग 3000 ई. पू. की प्रतीत होती है।
  • कोटदीजी में एक आदि-हड़प्पा स्तर मिला है। इस स्तर के मृद् भाण्डों में मोर, मृग, मत्स्य आकृतियों का अपरिष्कृत चित्रण हुआ है।
  • कोटदीजी के विस्तृत स्तर में कांस्य की चपटे फलक वाली कुल्हाड़ी, तीराग्र ,छेनी, अंगूठी व दोहरी एवं इकहरी चूड़ियाँ आदि वस्तुएँ मिली हैं।

सोहगौरा

  • यह गोरखपुर से ३५ किमी दक्षिण-पूर्व में राप्ती नदी के किनारे स्थित है।
  • सोहगौरा से प्राप्त होने वाला अभिलेख चित्रलिपि से अक्षर लिपि का पहला उदाहरण है।
    • सोहगौरा ताम्रलेख, एक ताम्रपट्ट पर लेखबद्ध प्राचीन लेख है जो उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास सोहगौरा नामक स्थान से प्राप्त हुआ है।
    • इस ताम्रलेख की लिपि ब्राह्मी है और भाषा प्राकृत।
  • पूर्वाचल के इस क्षेत्र में मौर्य, गुप्त सहित अन्य राजवंशों के लगभग 57 अभिलेख प्राप्त हुए हैं।
  • सोहगौरा का पुरास्थल भारतीय लेखन कला की प्राचीनता को प्रमाणित करने वाला पहला अभिलेख प्रस्तुत करता है।
    • इसमें अकाल एवं दुर्भिक्ष के समय जनता के उपयोग के लिए अन्न के तीन कोष्ठागारों के बनाने का वर्णन है।

देसलपुर

  • गुजरात के भुज ज़िले में स्थित ‘देसलपुर’ की खुदाई ‘पी.पी. पाण्ड्या’ और ‘एक. के. ढाके’ द्वारा किया गया ।
  • इस नगर के मध्य में विशाल दीवारों वाला एक भवन था जिसमें छज्जे वाले कमरे थे जो किसी महत्त्वपूर्ण भवन को चिह्नित करता है।

IAS Prelims Question Paper In Hindi

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