UPSC Syllabus In Hindi : प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा

UPSC Syllabus In Hindi : इस प्रतियोगिता परीक्षा में दो क्रमिक चरण हैं :

  1. मुख्य परीक्षा के लिए उम्मीदवार के चयन हेतु सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा वस्तुपरक तथा 
  2. विभिन्न सेवाओं तथा पदों पर सीधी भर्ती हेतु उम्मीदवार का चयन करने के लिए सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा (लिखित तथा साक्षात्कार)

विभिन्न सेवाएं इस प्रकार हैं :

  • भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)
  • भारतीय पुलिस सेवा (IPS)
  • IFS :भारतीय विदेश सेवा
  • भारतीय राजस्व सेवा (IRS) – (आयकर)
  • भारतीय राजस्व सेवा (IRS) – (सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद)
  • IA&AS : भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा
  • भारतीय रक्षा लेखा सेवा (IDAS)
  • भारतीय रक्षा संपदा सेवा (IDES)
  • IOFS: भारतीय आयुध कारखाना सेवा
  • संघ शासित प्रदेश पुलिस सेवा
  • भारतीय डाक एवं तार लेखा एवं वित्त सेवा (IP&TAFS)
  • भारतीय रेलवे लेखा सेवा (IRAS)
  • संघ शासित प्रदेश प्रशासनिक सेवा
  • भारतीय रेलवे ट्रैफिक सेवा (IRTS)
  • भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा (IRPS)

प्रारंभिक परीक्षा

  • प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुपरक (बहुविकल्पीय प्रश्न) प्रकार के 2 प्रश्न-पत्र होंगे 
  • परीक्षा में दो अनिवार्य प्रश्न-पत्र होंगे जिसमें प्रत्येक प्रश्न-पत्र 200 अंकों का होगा |

प्रारंभिक परीक्षा का पाठ्यक्रम (UPSC Syllabus In Hindi)

प्रश्न-पत्र – I  (200 अंक) अवधि दो घंटे :

  • राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ | 
  • भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन | 
  • भारत एवं विश्व का भूगोल : भारत एवं विश्व का प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल | 
  • भारतीय राज्यतंत्र और शासन- संविधान, राजनीतिक प्रणाली, पंचायती राज, लोकनीति, अधिकारों संबंधी मुद्दे आदि | 
  • आर्थिक और सामाजिक विकास- सतत विकास, गरीबी, समावेशन, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में की गई पहल आदि | 
  • पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे जिनके लिए  विषयगत विशेषज्ञता आवश्यक नहीं है | 
  • सामान्य विज्ञान | 

प्रश्न-पत्र – II  (200 अंक) अवधि दो घंटे :

  • बोधगम्यता ।
  • संचार कौशल सहित अंतर-वैयक्तिक कौशल ।
  • तार्किक कौशल एवं विश्लेषणात्मक क्षमता। 
  • निर्णय लेना और समस्या समाधान। 
  • सामान्य मानसिक योग्यता ।
  • आधारभूत संख्ययन (संख्याएँ और उनके संबंध, विस्तार-क्रम आदि) (दसवीं कक्षा का स्तर); आँकड़ों का निर्वचन (चार्ट, ग्राफ़, तालिका, आँकड़ों की पर्याप्तता आदि दसवीं कक्षा का स्तर)

टिप्पणी 1 : सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा का पेपर II, अर्हक पेपर होगा जिसके लिए न्यूनतम अर्हक अंक 33% निर्धारित किए गए हैं | 

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टिप्पणी 2 :  प्रश्न बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रकार के होंगे | 

टिप्पणी 3 :मूल्यांकन के प्रयोजन से उम्मीदवार के लिए यह अनिवार्य है कि वह सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के दोनों पेपर में सम्मिलित हो | यदि कोई उम्मीदवार सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के दोनों पेपरों में सम्मिलित नहीं होता है तो उसे अयोग्य ठहराया जाएगा |

मुख्य परीक्षा (UPSC Syllabus In Hindi)

प्रश्न-पत्र-1

निबंध (250 अंक)

प्रश्न-पत्र-2

सामान्य अध्ययन-1: (250 अंक) (भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज)

प्रश्न-पत्र-3

सामान्य अध्ययन-2:(250 अंक) (शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

प्रश्न-पत्र-4

सामान्य अध्ययन-3:(250 अंक) (प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव-विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा- प्रबंधन)

प्रश्न-पत्र-5 

सामान्य अध्ययन-4 : (250 अंक) (नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरूचि)

प्रश्न-पत्र-6 और प्रश्न-पत्र-7

वैकल्पिक विषय-(250 अंक-250 अंक) (प्रश्न-पत्र-1 और 2)

अर्हक प्रश्न पत्र (UPSC Syllabus In Hindi)

प्रश्न-पत्र (क) और प्रश्न-पत्र (ख) : भारतीय भाषाओं(संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कोई भाषाओं में से उम्मीदवारों द्वारा चुनी गई कोई एक  भारतीय भाषा) (300 अंक) और अंग्रेजी(300 अंक) पर अर्हक प्रश्न पत्र

मुख्य परीक्षा का योग      1750 अंक

साक्षात्कार                       275 अंक

कुल योग                        2025 अंक

टिप्पणी :

  • सभी उम्मीदवारों के निबंध, सामान्य अध्ययन तथा वैकल्पिक विषय के प्रश्न-पत्रों का मूल्यांकन भारतीय भाषा तथा अंग्रेजी के उनके अर्हक पर प्रश्न-पत्र के साथ ही किया जाएगा | 
  • निबंध, सामान्य अध्ययन तथा वैकल्पिक विषय के प्रश्न-पत्रों पर केवल ऐसे उम्मीदवार के मामले में विचार किया जाएगा, जो इन अर्हक प्रश्न पत्रों में न्यूनतम अर्हता मानकों के रुप में भारतीय भाषा में 25% अंक तथा अंग्रेजी में 25% अंक प्राप्त करते हैं | 

मुख्य परीक्षा का पाठ्यक्रम (UPSC Syllabus In Hindi)

मुख्य परीक्षा का उद्देश्य उम्मीदवारों की समग्र बौद्धिक गुणों तथा उनके गहन ज्ञान का आकलन करना है मात्र उनकी सूचना के भंडार तथा स्मरण शक्ति का आकलन करना नहीं है |

प्रश्न-पत्र-1

निबंध :

  • उम्मीदवार को विविध विषय पर निबंध लिखना होगा |
  • उनसे अपेक्षा की जाएगी कि वे निबंध के विषय पर ही केंद्रित रहें तथा अपने विचारों को सुनियोजित रूप से व्यक्त करें और संक्षेप में लिखें |
  • प्रभावी और सटीक अभिव्यक्ति के लिए अंक प्रदान किए जाएंगे |

प्रश्न-पत्र- 2

  • भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।
  • 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।
  • स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।
  • स्वतंत्रता के पश्चात् देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन।
  • विश्व के इतिहास में 18वीं सदी तथा बाद की घटनाएँ यथा औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनःसीमांकन, उपनिवेशवाद, उपनिवेशवाद की समाप्ति, राजनीतिक दर्शन जैसे साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि शामिल होंगे, उनके रूप और समाज पर उनका प्रभाव।
  • भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएँ, भारत की विविधता।
  • महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय
  • शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।
  • भारतीय समाज पर भूमंडलीकरण का प्रभाव।
  • सामाजिक सशक्तीकरण, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद और धर्मनिरपेक्षता।
  • विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएँ।
  • विश्व भर के मुख्य प्राकृतिक संसाधनों का वितरण (दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप को शामिल करते हुए), विश्व (भारत सहित) के विभिन्न भागों में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र के उद्योगों को स्थापित करने के लिये ज़िम्मेदार कारक।
  • भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणि-जगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।

प्रश्न-पत्र- 3

  • भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।
  • संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।
  • भारतीय संवैधानिक योजना की अन्य देशों के साथ तुलना।
  • संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।
  • कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, दबाव समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।
  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।
  • विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।
  • सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।
  • शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।
  • लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।
  • सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
  • विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।
  • केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
  • गरीबी एवं भूख से संबंधित विषय।
  • भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।
  • द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।
  • भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।
  • महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश। 

प्रश्न-पत्र- 4

  • भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
  • समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।
  • सरकारी बजट प्रक्रिया।
  • मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।
  • प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय, जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।
  • भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग- कार्यक्षेत्र एवं महत्त्व, स्थान, ऊपरी और नीचे की अपेक्षाएँ, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन।
  • भारत में भूमि सुधार।
  • उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।
  • बुनियादी ढाँचा : ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।
  • निवेश मॉडल।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
  • सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता ।
  • संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
  • आपदा और आपदा प्रबंधन।
  • विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध।
  • आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्वों की भूमिका।
  • संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।
  • विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

प्रश्न-पत्र- 5

  • नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंध : मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य ,महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।
  • अभिवृत्तिः सारांश (कंटेन्ट), संरचना, वृत्ति; विचार तथा आचरण के परिप्रेक्ष्य में इसका प्रभाव एवं संबंध; नैतिक और राजनीतिक अभिरुचि; सामाजिक प्रभाव और धारणा।
  • सिविल सेवा के लिये अभिरुचि (अभिक्षमता) तथा बुनियादी मूल्य, सत्यनिष्ठा, भेदभाव रहित तथा गैर-तरफदारी, निष्पक्षता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव, कमज़ोर वर्गों के प्रति सहानुभूति, सहिष्णुता तथा करुणा।
  • भावनात्मक समझ : अवधारणाएँ तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।
  • भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान।
  • लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; उत्तरदायित्व तथा नैतिक शासन; शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्दे; कॉरपोरेट शासन व्यवस्था।
  • शासन व्यवस्था में ईमानदारी : लोक सेवा की अवधारणा; शासन व्यवस्था और ईमानदारी का दार्शनिक आधार, सरकार में सूचना का आदान-प्रदान और पारदर्शिता, सूचना का अधिकार, नीतिपरक आचार संहिता, आचरण संहिता, नागरिक घोषणा पत्र, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता, लोक निधि का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।
  • विभिन्न उपर्युक्त विषयों पर मामला संबंधी अध्ययन (केस स्टडीज़)।

UPSC Syllabus In Hindi

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